जंगल की दुनिया : दुनिया का सबसे बड़ा घोंघा अफ्रीकन लैंड स्नेल

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Published By Anjali Singh
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अफ्रीकन लैंड स्नेल दुनिया के सबसे बड़े स्थलीय घोंघों में से एक है। इसका वैज्ञानिक नाम अचाटिना फुलिका है। मूल रूप से यह पूर्वी अफ्रीका का निवासी है, लेकिन आज यह एशिया, अमेरिका और प्रशांत द्वीपों सहित दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। तेजी से प्रजनन करने और विभिन्न प्रकार के वातावरण में जीवित रहने की क्षमता के कारण इसे दुनिया की सबसे खतरनाक आक्रामक (इनवेसिव) प्रजातियों में गिना जाता है।

यह घोंघा आकार में सामान्य घोंघों से कहीं बड़ा होता है। इसका खोल (शेल) लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर लंबा हो सकता है, जबकि पूरा शरीर 30 सेंटीमीटर तक फैल सकता है। इसका वजन कई सौ ग्राम तक पहुंच सकता है। भूरे और हल्के पीले रंग की धारियों वाला इसका शंकु आकार का खोल इसकी प्रमुख पहचान है।

अफ्रीकन लैंड स्नेल शाकाहारी होता है और 500 से अधिक प्रकार के पौधों को खा सकता है। यह सब्जियों, फलों, फूलों, पत्तियों और कृषि फसलों को नुकसान पहुंचाता है। यदि भोजन की कमी हो जाए, तो यह पेड़ों की छाल, गिरे हुए पत्तों, यहां तक कि दीवारों के प्लास्टर और चूने को भी चाटने लगता है, क्योंकि उसे अपने खोल के विकास के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इस जीव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी असाधारण प्रजनन क्षमता है। यह उभयलिंगी होता है, यानी एक ही घोंघे में नर और मादा दोनों प्रजनन अंग मौजूद होते हैं। एक वयस्क घोंघा साल में कई बार अंडे देता है और हर बार लगभग 100 से 400 अंडे दे सकता है। इसी कारण इसकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ जाती है और इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।

यह घोंघा केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रैट लंगवर्म नामक परजीवी का वाहक हो सकता है। यदि संक्रमित घोंघे को बिना सावधानी के छू लिया जाए या दूषित भोजन का सेवन किया जाए, तो यह परजीवी मनुष्यों में गंभीर संक्रमण और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए इसे कभी भी बिना दस्ताने के हाथ नहीं लगाना चाहिए।

भारत के कुछ राज्यों में भी अफ्रीकन लैंड स्नेल की मौजूदगी दर्ज की गई है। बरसात के मौसम में इसकी संख्या तेजी से बढ़ जाती है। कृषि विभाग समय-समय पर किसानों को इसकी पहचान और नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह देता है, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। अफ्रीकन लैंड स्नेल यह साबित करता है कि प्रकृति में किसी बाहरी प्रजाति का अनियंत्रित प्रसार पर्यावरण, कृषि और मानव स्वास्थ्य- तीनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए इसकी निगरानी, समय पर नियंत्रण और जनजागरूकता बेहद आवश्यक है।