एआई, क्वांटम विज्ञान और सनातन दर्शन

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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वर्तमान दर्शन के अनुसार मानव जीवन में अनंत काल से ही अपने अस्तित्व को लेकर जिज्ञासा रही है। जीवन का यह कौतूहल कि यह जीवन कहां से आया? इस जीवन के बाद क्या है और इसे बनाने वाला कौन है? यह प्रश्न मानव मस्तिष्क के परिष्कृत होने साथ ही सबसे पहले कौतूहल उसके बाद जिज्ञासा फिर आस्था, फिर दर्शन और उसके उपरांत विज्ञान के आविष्कार का कारण बना, परंतु आज आधुनिक विज्ञान की नित नई खोजों एवं नित नई टेक्नोलॉजी के विस्तार के बाद भी ‘मै कौन हूं’, ‘मेरा अस्तित्व क्या है’, ‘मरने के बाद हमारा क्या होता है’ तथा ‘ईश्वर है कि नहीं’ और ‘अगर है, तो उसका स्वरूप क्या है’। ये प्रश्न आज भी जस के तस बने हुए हैं, आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष एवं चंद्रमा तक चहलकदमी के साथ-साथ आज मानव अनंत ब्रह्मांड की गहराइयों में जाकर विशाल गैलेक्सियों, उनमें स्थित अरबों विशाल तारों ग्रहों की खोजों, सूर्य एवं मंगल गृह के जारी अपने अभियानों से सुदूर अंतरिक्ष तक अपनी तकनीकी से पहुंच बना चुका है।

आज मानव आधुनिक टेक्नोलॉजी से अनंत ब्रह्मांड की गहराइयों को तो नाप ही रहा है। साथ ही सूक्ष्म विज्ञान में भी नित नई खोजों के साथ सूक्ष्म परमाणु विज्ञान से लेकर आज क्वांटम भौतिकी के माध्यम से अति सूक्ष्म विज्ञान के क्षेत्र में भी काफी प्रगति कर चुका है, परंतु आज भी उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर से वह अभी काफी दूर है।

प्राचीन काल से ही मानव अस्तित्व एवं ईश्वर के अस्तित्व के इस यक्ष प्रश्न का उत्तर मानव समाज और सभ्यताएं खोजती रही है, उनमें से कई सभ्यताएं विस्मृत होकर काल के गाल में भी समा गईं। हजारों वर्षों के काल खंड कई सभ्यताएं स्थानांतरित होकर एक दूसरें में इतनी घुल मिल गईं कि उनकी पहचान और संस्कृति अपने प्राचीन मूल स्वरूप से काफी परिवर्तित हो गई है तथा समय के साथ ही बदलते-बदलते विभिन्न मानव सभ्यताएं आज के आधुनिक स्वरूप में स्थापित हुई है, परंतु आज भी आधुनिक विज्ञान की खोजों के साथ यह प्रश्न विशाल और विस्तृत होता जा रहा है।

प्रसिद्ध दार्शनिक प्लूटो का यह कथन कि “आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।” यह भी इन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों और जिज्ञासाओं के फलस्वरूप हो रही प्रगति पर सटीक लगता हैं। वर्तमान समय के विज्ञान का मुख्य आधार दर्शन और इससे उत्पन्न जिज्ञासा से उपजे भौतिक विज्ञान, उसके बाद आधुनिक विज्ञान, टेक्नोलॉजी तथा जैसे-जैसे मानव को विचारों को मापने के लिए गणितीय गणनाओं की आवश्यकता पड़ी तथा प्रयोगात्मक विषयों की विशाल गणितीय गणनाएं मानव मस्तिष्क की क्षमता से  बाहर होने लगीं, तो उन गणनाओं की आवश्यकता की पूर्ति ने कंप्यूटर का आविष्कार किया। इसके उपरांत तीव्र गणना करने वाले सुपर कंप्यूटर तथा उससे भी आगे अत्यंत आधुनिक टेक्नोलॉजी ए आई और वर्तमान में क्वांटम भौतिकी से लेकर क्वांटम कंप्यूटर तक के सफर के कारण आज मानव समझ को अत्यंत सूक्ष्म स्तर तक अध्ययन करने का भी अवसर मिला है, जिसके फलस्वरूप विशाल ब्रह्मांडीय गणना के साथ-साथ पदार्थ की सूक्ष्म से सूक्ष्म गणना करना भी संभव हो गया है। क्वांटम 

एआई से भौतिक विज्ञान की क्षमता और अधिक बढ़ने की उमीद है। हाल में हुई खोजों ने आज यह साबित कर दिया है। आज आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की अभूतपूर्व प्रगति  ने विज्ञान और भारतीय सनातन संस्कृति के अध्यात्म को काफी करीब ला दिया हैं। भारतीय शास्त्रों और मनीषियों द्वारा लिखे गए धर्म ग्रंथों में वर्णित ज्ञान को कपोल कल्पित कहने वाले आज उसकी सच्चाई को स्वीकारने लगे हैं। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर इस हेतु लंबी बहस छिड़ी रहती है। क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति ने मानव को सूक्ष्म विज्ञान को समझने में सहायता की है, जहां एक ओर ईश्वर है कि नहीं, मैं कौन हूं से प्रारंभ हुई मानव जिज्ञासा को आज सूक्ष्मता से समझने के लिए अनेक दार्शनिकों के विचारों, वैज्ञानिकों की खोजों का विशेष योगदान है, जिनकी आज एक लंबी लिस्ट है, जिन्होंने आज हमें इस मुकाम पर लाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय सनातन संस्कृति का ज्ञान सत्य ज्ञान है और विज्ञान की खोज भी सत्य की खोज के लिए है।

मोहन सिंह बिष्ट,  पत्रकार