लखीमपुर खीरी : दो संकुल की महिलाओं में जमकर मारपीट, घंटे भर चला बवाल
वित्तीय अनियमितताओं में कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंची महिलाओं पर बोला धावा
निघासन, अमृत विचार। आखिरकार जो अंदेशा था, वही हुआ। निघासन विकासखंड में वित्तीय अनियमितताओं में दोषी महिलाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी कराने और पदाधिकारियों का चुनाव कराने की मांग को लेकर विकास खंड कार्यालय पहुंची महिलाओं का आरोपी महिलाओं के गुट से आमना-सामना हो गया। आरोप है कि आरोपी सीएलएफ बेलरायां की पदाधिकारियों ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। ज्ञापन की प्रति भी फाड़कर फेंक दी। महिलाएं करीब एक घंटे तक जमकर बवाल करती रहीं।
महिलाओं का रौद्र रूप देखकर कर्मचारी ऑफिस छोड़कर भाग गए। एक घंटे जमकर महिलाओं ने बवाल काटा। बवाल के बाद पहुंची पुलिस ने किसी तरह से महिलाओं को शांत कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शनकारी महिलाएं पहले एसडीएम राजीव निगम को ज्ञापन सौंप चुकी थीं और इसके बाद बीडीओ को ज्ञापन देने ब्लॉक कार्यालय पहुंचीं। इसी दौरान पहले से मौजूद आरोपी पक्ष की बेलरायां सीएलएफ की पदाधिकारियों की महिलाओं ने उनसे बहस शुरू कर दी। दूसरे पक्ष की महिलाएं कुछ समझ पाती। इससे पहले ही बेलरायां सीएलएफ की पदाधिकारियों और उनके समर्थकों ने विरोध करने वाली महिलाओं पर हमला कर सुमन यादव नाम की महिला के हाथ से ज्ञापन छीनकर फाड़ दिया। इससे अन्य महिलाएं भी भड़क गईं और बवाल उग्र हो गया।
दोनों पक्षों की महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की, जिससे पूरे विकास खंड परिसर में अफरातफरी मच गई। महिलाओं के आक्रोश को देखकर ब्लॉक कार्यालय के कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय छोड़कर बाहर निकल गए। पीड़ित सुमन यादव ने बताया कि सीएलएफ की पदाधिकारी सुकेता तिवारी और लक्ष्मी श्रीवास्तव ने उनके साथ मारपीट की। ज्ञापन फाड़ दिया। उनके पति को भी दौड़ाकर अभद्रता की। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। घटना के दौरान ब्लॉक परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुट गई। ब्लॉक परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारी और सभी क्लस्टरों में निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग दोहराई है।
जांच टीम अधूरे बयान लेकर लौटी
इसी बीच जिले से वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची टीम भी विवाद के कारण अपना काम पूरा नहीं कर सकी। हंगामे के चलते कई महिलाओं के बयान अधूरे रह गए। बाद में बीडीओ ने जांच आगे जारी रखने की बात कही और बिना पूर्व सूचना के पहुंचने पर जांच टीम को भी फटकार लगाई। बताते हैं कि जांच करने के लिए जिला मिशन प्रबंधक सुरजन सिंह के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम पहुंची थी, टीम और औपचारिकता पूरी कर वापस लौट गई।
बीएमएम आशीष दीक्षित का स्थानांतरण
बीडीओ जयेश कुमार सिंह ने बताया कि लगातार बन रहे विवाद और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए बीएमएम आशीष दीक्षित का स्थानांतरण उपायुक्त एनआरएलएम जितेंद्र कुमार मिश्रा ने विकासखंड कुंभी कर दिया है। उनके स्थान पर अभी किसी बीएमएम की तैनाती नहीं की गई है।
समय रहते जांच और कार्रवाई होती तो टल सकता था बवाल
निघासन में शुक्रवार को जो भी कुछ हुआ। उसके पीछे उपायुक्त स्वरोजगार जितेंद्र कुमार मिश्रा की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। माना जाता है कि यदि डीसी जांच, कार्रवाई और चुनाव को लेकर टालमटोल न करते और समय से कार्रवाई कर देते तो शायद यह घटना न होती। पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने डीसी एनआरएलम को इसके लिए दोषी ठहराया है और उनका स्थानांतरण कर पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि वह करीब तीन महीने से डीसी कार्यालय के चक्कर काट रहीं और कार्रवाई की मांग कर रहीं थी, लेकिन वह कार्रवाई का भरोसा देते हुए सिर्फ टहलाते रहे। आरोपी पक्ष भी लगातार डीसी कार्यालय पर जाता रहा। आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच चल रही तल्खी से विवाद के आसार बन गए थे, लेकिन वित्तीय अनियमितताओं में फंसी महिलाओं को संरक्षण देते हुए उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जब मामला मीडिया में सुर्खियां में आया। तब भी उनकी लापरवाही जारी रही। महिलाओं ने कहा कि यदि डीसी समय से जांच कराकर वित्तीय अनियिमताओं को कर नियम विरुद्ध तरीके से लाखों रुपये की हेराफेरी करने के मामले में दोषियों पर कार्रवाई करते और चुनाव कराते तो यह बवाल नहीं होता।
ब्लॉक स्तरीय जांच को भी दबा गए उपायुक्त
घोटाले की खबरें जब अमृत विचार में प्रमुखता से छपी तो हरकत में आए डीसी जितेंद्र कुमार मिश्रा ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। जांच टीम में शामिल सहायक विकास अधिकारी निघासन राकेश कुमार, फूलबेहड़ के अनुराग पांडेय और धौरहरा के अनुज अवस्थी ने जांच कर 3 जून 2026 को रिपोर्ट डीसी एनआरएलएम को सौंप दी थी, जांच रिपोर्ट में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं मिली थीं। जांच टीम ने प्रथम आरोप सही पाए थे। साथ ही सीएलएफ के पदाधिकारियों को वर्ष 2016 से अपने पदों पर यथावत पाया था, जबकि हर दो साल पर चुनाव होना था। टीम ने पदाधिकारियों के बदलाव पर जोर दिया था, लेकिन डीसी एनआरएलएम पूरी रिपोर्ट को दबाए रहे और जांच जारी होने की बात कहकर कार्रवाई से बचते रहे।
