समीक्षा : देशभक्ति की नई परिभाषा

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

‘भारत भाग्य विधाता’ पारंपरिक मसाला फिल्मों से बिल्कुल अलग एक संवेदनशील और यथार्थवादी फिल्म है। निर्देशक मनोज तपड़िया ने देशभक्ति को बड़े-बड़े संवादों, अवास्तविक एक्शन और चकाचौंध से दूर रखते हुए वास्तविक नायकों की कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया है। यह फिल्म मनोरंजन से अधिक सोचने पर मजबूर करती है।

फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले के उस पहलू पर केंद्रित है, जिस पर बहुत कम चर्चा हुई। जहां अधिकांश फिल्में ताज होटल और ओबेरॉय की घटनाओं तक सीमित रहती हैं, वहीं यह फिल्म कामा एंड अल्ब्लेस अस्पताल की भयावह रात को सामने लाती है। आतंकियों के अस्पताल में घुसने के दौरान वहां मौजूद स्टाफ नर्स अंजलि कुलथे अपने साहस, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा से 20 गर्भवती महिलाओं की जान बचाने का प्रयास करती हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी और भावनात्मक प्रस्तुति है। इसमें किसी सुपरहीरो जैसी छवि या अतिरंजित देशभक्ति नहीं दिखाई गई, बल्कि यह संदेश दिया गया है कि असली वीरता अपने कर्तव्य को कठिन परिस्थितियों में भी निभाने में होती है। कलाकारों का अभिनय प्रभावशाली है और निर्देशन कहानी को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ाता है।

यदि आप केवल एक्शन, ग्लैमर और मसाला मनोरंजन की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो यह फिल्म आपको अलग अनुभव देगी, लेकिन यदि आप सच्ची घटनाओं पर आधारित, भावनात्मक और प्रेरक सिनेमा पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ जरूर देखनी चाहिए। यह फिल्म उन गुमनाम नायकों को सम्मान देती है, जिनकी बहादुरी इतिहास के शोर में अक्सर दब जाती है। यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

समीक्षक- सौमिल तिवारी, मुंबई

 

टॉप न्यूज