राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : कैश काउंटिंग रूम के अंदर से आरोपियों की तस्वीर आई सामने, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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Published By Deepak Mishra
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच को नया मोड़ देने वाला अहम सबूत सामने आया है। जांच एजेंसियों को पहली बार ऐसी तस्वीर मिली है, जिसमें दोनों मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के नकदी गिनती केंद्र (कैश काउंटिंग रूम) के अंदर दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह तस्वीर जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है क्योंकि इसमें आरोपी उस स्थान पर मौजूद हैं, जहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की गिनती की जाती थी।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार

मामले में अब तक कुल आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।

सीसीटीवी निगरानी में लापरवाही का आरोप

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था की कथित कमियों का फायदा उठाया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंट्रोल रूम की नियमित निगरानी नहीं हो रही थी। इसी कारण आरोपी कथित तौर पर बिना किसी रोक-टोक के नकदी निकालने में सफल रहे। सूत्रों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ आरोपी नकदी गिनती क्षेत्र से रुपये लेते हुए दिखाई दिए हैं। जांचकर्ताओं के मुताबिक, पहले उन्होंने कैमरों से बचने का प्रयास किया, लेकिन निगरानी कमजोर होने का एहसास होने पर वे अधिक बेखौफ होकर गतिविधियां करते रहे।

भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों ने अब मंदिर में दान प्रबंधन के लिए कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया की भी जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि मार्च 2025 में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। सूत्रों के अनुसार, उस समय ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय ने भर्ती की जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल मिश्रा को सौंपी थी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि उम्मीदवारों का इंटरव्यू और नियुक्ति प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

पहचान पत्र के बिना मिली थी ड्यूटी

जांच में यह भी सामने आया है कि नियुक्त कर्मचारियों को शुरुआत में आधिकारिक पहचान पत्र जारी नहीं किए गए थे। उन्हें केवल ट्रस्ट की ड्यूटी शीट के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। प्रत्येक कर्मचारी को लगभग 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की शिफ्ट में तैनात किया गया था।

दो स्थानों पर होती थी नकदी की गिनती

जांच के अनुसार, दान की बढ़ी हुई मात्रा को देखते हुए नकदी की गिनती दो अलग-अलग केंद्रों पर की जा रही थी। एक केंद्र तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (PFC) भवन में संचालित होता था, जबकि दूसरा मंदिर परिसर स्थित पुलिस चौकी में बनाया गया था। नए कर्मचारियों को मुख्य रूप से पुलिस चौकी स्थित गिनती केंद्र पर तैनात किया गया था, जहां वे नोटों की छंटाई, बंडल तैयार करने और गिनती मशीनों का संचालन करते थे।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

पीएफसी भवन के बेसमेंट में स्थित मुख्य नकदी गिनती केंद्र में सीसीटीवी कंट्रोल रूम, कर्मचारियों का भोजन कक्ष और भारतीय स्टेट बैंक का काउंटर मौजूद था, जहां गिनी गई राशि जमा कराई जाती थी। यहां निजी सुरक्षा कर्मियों के साथ कुछ अवसरों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की जाती थी। इसके बावजूद जांचकर्ताओं का आरोप है कि सीसीटीवी मॉनिटरिंग पर्याप्त नहीं थी। निगरानी के लिए नियुक्त कर्मचारी कथित तौर पर कई बार कंट्रोल रूम से बाहर रहते थे, जिससे पूरी प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी नहीं हो सकी।

नकदी गिनती की निगरानी की थी जिम्मेदारी

मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव पर नकदी गिनने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी थी। उनके कार्यों में दान पेटियों से निकाली गई नकदी प्राप्त करना, गिनती की देखरेख करना और राशि को बैंक तक पहुंचाना शामिल था।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि दान में मिले आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड किस प्रकार रखा जाता था। सूत्रों के अनुसार, आभूषणों का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं होने के कारण जांच का दायरा इस पहलू तक भी बढ़ाया गया है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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