रंग-तरंग : ‘युगमंच’ 50 वर्षों की यात्रा और ‘The Zoo Story’ का मंचन
कभी-कभी आप ऐसे सुखद संयोगों के स्वामी हो जाते हैं कि वह संयोग आपके जीवन की अमूल्य धरोहर बन जाते हैं। विगत 21- 22 जून को ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ। नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन’ के महासचिव प्रयाग पांडे द्वारा मुझे निमंत्रित किया गया था ‘उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन’ के समारोह में, जो 21 जून को नैनीताल क्लब, नैनीताल में संपन्न हुआ। 22 जून को 50 वर्ष पूर्व नैनीताल में जिस बीज का रोपण हुआ था, उसने इन वर्षों में एक विशालकाय वृक्ष का रूप ले लिया है। कवि हेमंत बिष्ट के संचालन में संपन्न ‘युगमंच’ के इस आयोजन में नैनीताल शहर के अधिकांश रंगकर्मी एवं अकादमिक संसार के सदस्य मौजूद थे।
नाटक का मंचन
'द ज़ू स्टोरी' अमेरिकन लेखक Edward Albee द्वारा वर्ष 1958 में लिखा गया नाटक है। उस वक्त Albee की उम्र मात्र 29 वर्ष थी और इसका पहला मंचन वर्ष 1959 में बर्लिन में हुआ। नाटक न्यूयॉर्क के सेंट्रल एवेन्यू पार्क की एक बेंच से शुरू होता है, जहां पीटर (Parag Sarmah) जो कि एक पब्लिशिंग हाउस में सीनियर एग्जिक्यूटिव हैं, एक दोपहर किताब पढ़ने के उद्देश्य से पार्क में आता है। पीटर दो लड़कियों का पिता है, घर में पत्नी, दो बिल्लियां और दो Parakeet (लंबी पूंछ वाला छोटा तोता) है। जब पीटर पार्क में बेंच पर settle हो रहा होता है, तो वहां जैरी (सुमन वैद्य) पहुंच जाता है। जैरी, जीवन से निराश एक व्यक्ति है, वह एक मलिन बस्ती में रहता है।
लगभग सवा घंटे के इस द्विपात्री नाटक में दोनों पात्रों के मध्य लगातार संवाद चलता रहता है। जैरी बताना चाहता है कि वह Zoo क्यों गया था? लेकिन इस बात को बताने के क्रम में वह मूल बात को बताने के बजाय लगातार दूसरी बातें बताता रहता है। जैसे अपने परिवार के बारे में, उस बिल्डिंग के बारे में जहां वह रहता है, उस बिल्डिंग में रहने वाले पड़ोसियों के बारे में, अपनी ख़ूसट मकान मालकिन के बारे में, उसके कुत्ते के बारे में जो हमेशा जैरी को काटने की फिराक में रहता था और जिसे जहर देकर खत्म करने की जैरी ने कोशिश की, लेकिन कुत्ता मरा नहीं। नाटक के अंतिम 15 मिनट बेंच पर आधिपत्य को लेकर पीटर और जैरी के मध्य द्वंद्व को समर्पित थे। अंततः जैरी अपने बक्से से एक चाकू निकालता है और चाकू को ( एक छोटी झड़प के बाद) पीटर को दे देता है और उस चाकू से खुद को मार लेता है।
लगभग सवा घंटे का यह नाटक आखिर है क्या? 'महानगरों में व्याप्त संवादहीनता के मध्य जीवन से निराश एक व्यक्ति को अपनी व्यथा सुनाने के लिए किसी शिकार की तलाश? या पिछली शताब्दी के पांचवे दशक में लिखे गए Absurd थियेटर की एक कड़ी या जीवन और समाज के प्रश्नों को नाटक में घटना नहीं वरन संवाद के माध्यम से उद्घाटित करना। या मनुष्य द्वारा मूल बात कहने के बजाय इतर बातों में उलझ जाने की प्रवृत्ति।' इस नाटक के कई Interpretation हो सकते हैं, लेकिन पूरी स्क्रिप्ट में मुझे एक बात खटकती रही कि लेखक में आखिर Jerry को एक dominant करेक्टर के तौर पर क्यों चित्रित किया और पीटर को एक बेहद weak चरित्र के तौर पर। सवा घंटे के इस नाटक में लगभग 40 मिनट तो Jerry का monologue ही था। नाटक को देखते हुए कार्टून श्रृंखला Tom & Jerry की याद आ रही थी, जहां नाटक में Jerry, Tom का किरदार अदा कर रहा था।
कुल मिलाकर युग मंच के 50 वर्ष पूर्ण होने की एक धमाकेदार शुरुआत विगत 22 जून को नैनीताल में हुई है। आयोजकों का कहना था कि अब वर्ष भर ऐसे ही आयोजन करने का उनका विचार है। युग मंच का गोल्डन जुबली ईयर निश्चित रूप से हिंदी रंगमंच को समृद्ध करेगा। साथ ही नैनीताल में रंगमंचीय गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम होगा। हमारे जैसे तमाम प्रेमियों को ‘युगमंच’ के आगामी आयोजनों की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रतुल जोशी, लेखक
