Kanpur Muharram: यौमे आशूरा पर हर आंखें अश्कबार.... करबला में ताजिये सुपुर्द-ए-खाक
हजारों की संख्या में ताजिये दफनाये गये, शाम को चिराग जला खीर चढ़ाया, फातिहा
कानपुर, अमृत विचार। करबला के मैदान में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत के दसवें दिन यौम-ए-आशूरा पर पूरे शहर में गम और अकीदत का सैलाब देखा गया। हर किसी की आंखें डबडबा गई। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकले ताजिया जुलूस में लाखों लोगों ने शिरकत की और करबला में ताजिये दफन कर दिये गये।
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शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद छूरी, तलवार और जंजीरों से मातम कर इमाम-ए-आलीमकाम को नजराने अकीदत पेश किया गया। चमनगंज, बेकनगंज, बाबूपुरवा, बेगमपुरवा, फजलगंज, जूही लाल कालोनी, बगाही, रावतपुर, रोशन नगर, मछरिया, जाजमऊ समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ताजिया जुलूस निकाले गये जो देर रात बड़ी करबला नवाबगंज, छोटी करबला मकबरा ग्वालटोली, बगाही करबला, रोशन नगर करबला, जाजमऊ करबला समेत शहर के सभी करबला में पहुंचते रहे।
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इस दौरान सईदाबाद, चमनगंज, नई सड़क, बाबूपुरवा, छोटी बजरिया समेत शहर के विभिन्न इलाकों के इमामबाड़ों पर जरी, मोती, मोम के ताजिये भी करबला तक पहुंचे लेकिन इनको दफनाने के बजाए उनपर चढ़ाए गए चढ़उवा ताजिये, फूल मालाओं को करबला में दफना दिया गया। एक अनुमान के मुताबिक शहर की करबला में लगभग 3500 ताजिये दफनाये गये।
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पांच लाख की ताजिया की जियारत को उमड़ी भीड़
मकबरा ग्वालटोली स्थित छोटी करबला विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक ताजिया जुलूस पहुंचे जिसमें एक चांदी के वर्क से बनाई गई खूबसूरत ताजिया देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ताजियादार मुन्ना ने बताया कि इस ताजिया को बनाने में लगभग पांच लाख रुपये का खर्च आया है। इस ताजिया पर चढ़ाये गये फूलों को करबला में दफना दिया गया और बाकी ताजिया को वापस ले गये। ऐसे ही सईदाबाद से मोती की ताजिया करबला तक पहुंची लेकिन इस ताजिया पर चढ़ाए गये फूल व चढ़उवा ताजिया को ही दफनाया गया, बाकी ताजिया वापस अपने इमामबाड़े पर आ गई।
करबला में खीर चढ़ाई, चिरागां किया, फातिहा पढ़ी
देर शाम करबला में हजारों महिलाओं की भीड़ पहुंची जिन्होंने जहां जहां ताजिये दफन की गई थीं, वहां खीर चढ़ाई और चिराग के साथ ही मोमबत्ती जलाकर रखा और फातिहा पढ़ी। सबसे ज्यादा छोटी करबला और बगाही करबला में महिलाओं की देर रात तक भीड़ रही और पूरी करबला रोशनी से रोशन किया गया।
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