अयोध्या में होम-स्टे बिजनेस ठप और बाजारों से पर्यटक गायब, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से घटे श्रद्धालु

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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अयोध्या, अमृत विचार। रामनगरी में तेज धूप और भीषण गर्मी के कारण आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घट गई है। जिसका असर खुदरा व्यापार करने वाले व्यापारियों और होम स्टे स्वामियों पर पड़ रहा है। रामनगरी में इन दिनों भीषण गर्मी का कहर जारी है। लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। सुबह होते ही धूप की तेज से अधिकतर अपने घरों से निकले में भी कतरा रहे हैं। दोपहर होते ही अयोध्या की सड़कें खाली हो जाती है। 

वहीं अयोध्या में श्रद्धालु भी कम आ रहे है। जिसके करण राम मंदिर के आसपास रामपथ पर लगने वालीं खुदरा दुकानें भी धीरे-धीरे कम होने लगी हैं। इन व्यवसाईयों में अधिकतर बाहर के व्यापारी शामिल हैं, जो अब अपने घरों की ओर प्रस्थान भी कर रहे हैं। इसके साथ ही अयोध्या में बड़ी मात्रा में बनाए गए होम स्टे संचालकों के लिए भी मुसीबत बढ़ गई है।

संचालक शत्रुघ्न गुप्ता की माने तो इन दोनों खर्च निकालना भी दुभर हो रहा है, जबकि इसके पहले जनवरी-फरवरी और मार्च के महीने में अच्छा व्यापार हुआ था। राम मंदिर गेट के पास प्रसाद बेचने वाले व्यापारी आशुतोष गुप्ता बताते हैं कि इसमें व्यापार बिल्कुल से ठप सा हो गया है, श्रद्धालुओं की संख्या कम है। पहले जिस तरह से कार्य चल रहे थे उसका 50 प्रतिशत भी कार्य नहीं हो पा रहा है। बताया कि बहुत से लोग अपने घर भी चले गए हैं। अब जून के बाद व्यापार में कुछ बढ़ोतरी होने की संभावना है।

मिल्कीपुर में आंधी के साथ हुई बारिश

मिल्कीपुर में आंधी के साथ शुक्रवार सुबह को हुई तेज बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कुराहट ला दी। किसानों का कहना कि ये पानी नहीं ये हमारे लिए सोना है। किसान कोटडीह निवासी बृजेश शुक्ला उर्फ करिया ने कहा कि इस समय धान की खेती हो रही है, जिसमें पानी की बहुत जरूरत है। बिजली की आवाजाही के कारण मोटर से भी पानी नहीं पूरा पड़ रहा है।

ये बरसात नहीं हमारे लिए सोना है, बोले किसान

बताया कि ये पानी हम लोगों के लिए सोना है और खेत में पड़े धान के बीज व जो किसान भाई धान की रोपाई कर चुके हैं उनके लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है। अंकित शुक्ला ने कहा कि इस समय हमारे यहां बिजली कम मात्रा में मिल रही है जिससे खेत में लगे पानी में काफ़ी समय लगता है। जो पानी खेत में भरता था लाइट जाने के बाद वह फिर सुख जाता था। अब इस बारिश से कुछ राहत जरूर मिलेगी।

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