खोज : ऐसे हुआ बैटरी का आविष्कार
आज मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन और अनगिनत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बैटरी के बिना अधूरे हैं, लेकिन इसकी शुरुआत लगभग 225 वर्ष पहले हुई थी। वर्ष 1800 में इटली के वैज्ञानिक अलेस्सांद्रो वोल्टा ने दुनिया की पहली व्यावहारिक बैटरी का आविष्कार किया। उन्होंने तांबे और जस्ता की धातु की गोल प्लेटों को नमक के घोल में भीगे कपड़ों की परतों के साथ एक के ऊपर एक जमाया। इस संरचना को वोल्टाइक पाइल कहा गया, जो लगातार विद्युत धारा उत्पन्न करने वाला पहला उपकरण बना।
इस खोज की प्रेरणा वैज्ञानिक लुइगी गैलवानी के उन प्रयोगों से मिली, जिनमें उन्होंने मेंढक की टांगों में विद्युत प्रतिक्रिया देखी थी। वोल्टा ने साबित किया कि बिजली का स्रोत जीवित ऊतक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग धातुओं के बीच होने वाली रासायनिक क्रिया है। वोल्टा की खोज ने विद्युत विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
इसके बाद रिचार्जेबल बैटरियां, ड्राई सेल, लिथियम-आयन और आज की अत्याधुनिक सॉलिड-स्टेट बैटरियों का विकास संभव हुआ। आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीक की नींव इसी आविष्कार ने रखी। आज बैटरियां केवल उपकरणों को चलाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और भविष्य की टिकाऊ तकनीकों का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुकी हैं।
वैज्ञानिक के बारे में
अलेस्सांद्रो वोल्टा का जन्म 18 फ़रवरी 1745 को इटली के कोमो नगर में एक कुलीन परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि विज्ञान और प्राकृतिक घटनाओं को समझने में थी। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय भौतिकी के अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान में बिताया। वोल्टा ने 1794 में मारिया तेरेसा पेरेग्रिनी से विवाह किया, जिनसे उनके तीन पुत्र हुए। वे सरल, अनुशासित और शांत स्वभाव के व्यक्ति माने जाते थे। अपने वैज्ञानिक योगदान के कारण उन्हें व्यापक सम्मान मिला और नेपोलियन बोनापार्ट ने भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। 5 मार्च 1827 को 82 वर्ष की आयु में कोमो में उनका निधन हुआ।
