इंटरसेप्टर वाहनों से 76 दिन में 16,347 ई-चालान
यातायात पुलिस ने शुरू की ओवरस्पीड और स्टंटबाजी पर सख्ती
कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: राजधानी में ओवरस्पीडिंग, स्टंटबाजी और खतरनाक वाहन चलाने पर लगाम कसने के लिए यातायात पुलिस ने इंटरसेप्टर वाहनों का प्रयोग शुरू कर दिया है। आधुनिक तकनीक से लैस इन वाहनों की मदद से मई से 15 जुलाई तक कुल 76 दिन में 16,347 ई-चालान किए गए हैं। यातायात पुलिस के कार्रवाई का मकसद केवल चालान करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और लोगों में सुरक्षित ड्राइविंग की आदत विकसित करना है।
डीसीपी यातायात रवीना त्यागी के मुताबिक, शहर में वर्तमान में एक चारपहिया और चार दोपहिया इंटरसेप्टर वाहन सक्रिय हैं। इनकी तैनाती प्रमुख मार्गों, हाई-स्पीड कॉरिडोर, दुर्घटना संभावित इलाकों और संवेदनशील चौराहों पर रोटेशन प्रणाली के तहत की जाती है, ताकि पूरे शहर में प्रभावी निगरानी रखी जा सके। इंटरसेप्टर वाहनों में स्पीड डिटेक्शन सिस्टम, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, वीडियो रिकॉर्डिंग और ई-चालान प्रणाली लगी है। इनकी मदद से ओवरस्पीडिंग, खतरनाक ड्राइविंग, सार्वजनिक सड़कों पर स्टंट बाइकिंग, मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल जैसे उल्लंघनों का डिजिटल साक्ष्य जुटाकर ई-चालान किया जा रहा है। इससे कार्रवाई पारदर्शी और साक्ष्य आधारित बन रही है।
हर रोज काटे गये 216 वाहनों का चालान
यातायात पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इंटरसेप्टर वाहनों से की गई कार्रवाई में लगातार बढ़ोतरी हुई है। मई में 2,529 ई-चालान, जून में 8,986 ई-चालान और जुलाई शुरुआती 15 दिन में 4,832 वाहनों का ई-चालान किया गया। इस तरह तीन माह में कुल 16,347 ई-चालान किए गए। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो हर रोज 216 वाहनों के चालान काटे गये हैं। पुलिस इसके अलावा जागरूकता अभियान भी चला रही है।
डीसीपी ने की कार्रवाई का निगरानी
पुलिस उपायुक्त यातायात ने समतामूलक चौराहे पर तैनात इंटरसेप्टर वाहन का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पीड डिटेक्शन सिस्टम, कैमरों, वीडियो रिकॉर्डिंग और ई-चालान व्यवस्था की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि तकनीकी उपकरणों का अधिकतम उपयोग करें, डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संधारण करें और निर्धारित एसओपी के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। इंटरसेप्टर वाहनों के जरिये नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई ही नहीं की जा रही है, बल्कि वाहन चालकों को निर्धारित गति सीमा का पालन करने, स्टंटबाजी से बचने, मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल न करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
