Gorakhpur Ram Katha : 'भक्ति के बिना जीवन में अंधकार और अराजकता', श्रीराम कथा के शुभारंभ पर बोले CM योगी
गुरु पूर्णिमा पर गोरखनाथ मंदिर में सात दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ, बोले- ज्ञान और भक्ति से ही जीवन के रहस्य समझे जा सकते हैं
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भक्ति के बिना जीवन में अंधकार, अराजकता और अज्ञानता रहती है। उन्होंने श्रीराम कथा को ज्ञान और भक्ति का सर्वोत्तम माध्यम बताते हुए सनातन संस्कृति, श्रीराम के आदर्शों और उत्तर प्रदेश के तीर्थस्थलों की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भक्ति के बिना जीवन में अंधकार, अराजकता और अज्ञानता का वास होता है। जीवन को सुगम और सार्थक बनाने के लिए ज्ञान और भक्ति का अनुसरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा और श्रीमद्भागवत कथा जैसी पावन कथाओं के माध्यम से ही व्यक्ति को सच्चे ज्ञान और भक्ति की प्राप्ति होती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के शुभारंभ समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में व्यासपीठ का पूजन करने के बाद उन्होंने कहा कि जहां भक्ति नहीं होती, वहां केवल अंधकार, अराजकता और अज्ञानता होती है। इन सभी से मुक्ति का मार्ग भक्तिसम्मत ज्ञान ही है।
'हर सनातनी के श्वास-श्वास में बसते हैं प्रभु श्रीराम'
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम प्रत्येक भारतीय के मन और अंतःकरण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी के श्वास-श्वास में प्रभु श्रीराम का वास है। चाहे बालक हो, युवा, वृद्ध, गृहस्थ या विरक्त, हर व्यक्ति स्वयं को श्रीराम के नाम से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में जाएं, चाहे व्यक्ति हिंदी भाषी हो या अहिंदी भाषी, अभिवादन का सबसे सामान्य स्वर 'जय श्रीराम' सुनाई देता है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में 'राम-राम जी' कहकर लोग एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। योगी ने कहा कि यह संबोधन केवल अभिवादन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और मर्यादा का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश के तीर्थ सनातन मूल्यों की पहचान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की आध्यात्मिक हृदयस्थली है। मर्यादा की चर्चा होती है तो अयोध्या की ओर देखा जाता है, जीवन के रहस्यों को समझने के लिए काशी और भक्ति की भावना को जानने के लिए मथुरा-वृंदावन का स्मरण किया जाता है। वहीं समरसता का संदेश प्रयागराज से मिलता है। उन्होंने कहा कि दुनिया चाहे जितना दुष्प्रचार करे, लेकिन सनातन मूल्यों को समझने और अनुभव करने का सबसे बड़ा अवसर उत्तर प्रदेश के तीर्थस्थलों पर ही मिलता है।
आचार्य शांतनु सुना रहे हैं सात दिवसीय श्रीराम कथा
मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद प्रयागराज से पधारे कथा व्यास आचार्य शांतनु ने श्रीराम कथा का शुभारंभ किया। यह कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगी।
151 वेदपाठी विद्यार्थियों के मंत्रोच्चार के बीच निकली शोभायात्रा
श्रीराम कथा शुरू होने से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से कथा स्थल तक श्रीरामचरितमानस की पोथी शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजे, शंखनाद और 151 वेदपाठी विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली इस शोभायात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर व्यासपीठ का पूजन किया गया।
इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत राजूदास, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, यजमान बैजनाथ जायसवाल, अमित जायसवाल सहित अनेक साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
