Bareilly News : उर्से रजवी में बिरयानी नहीं, शाकाहारी लंगर चलेगा...दरगाह आला हजरत से लंगर कमेटियों के लिए क्यों जारी हुआ ये संदेश
सावन महीने और शिवभक्तों की आस्था का सम्मान करते हुए बरेली में उर्स-ए-रजवी के दौरान मांसाहारी भोजन पर रोक रहेगी। दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां ने सभी लंगर कमेटियों से केवल शाकाहारी खाना बांटने की अपील की है।
बरेली, अमृत विचार। सुन्नी-बरेलवी मुसलमानों के मरकज (केंद्र) दरगाह आला हजरत से गंगा जमुनी तहजीब की बड़ी मिसाल सामने आई है। उर्से रजवी के लंगरों में इस बार बिरयानी नहीं बनेगी, बल्कि शाकाहारी लंगर चलेंगे। दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) ने सावन के कारण ये फैसला लिया है। सावन में नाथनगरी शिवमय है। शिवालय सजे रहे हैं। मांस-मदिरा पर रोक है। ऐसे में दरगाह प्रबंधन ने उर्से रजवी के लंगर में मांसाहारी पकवान से परहेज करके बड़ी नजीर पेश की है। दरगाह प्रमुख ने सभी लंगर कमेटियों से अपील की है कि वे मांसाहारी भोजन के बजाय, शाकाहारी लंगर का प्रबंध करें।
6 अगस्त को परचम कुशाई के साथ उर्से रजवी का आगाज होगा। 8 अगस्त तक उर्स चलेगा। उर्से रजवी के दो प्रमुख बड़े मंच हैं। इस्लमामिया मैदान और मथुरापुर स्थित मदरसा जामितयातुर्रजा। इसके अलावा भी कई जगह कुल की रस्म अदा की जाती है। रजाकारों की ओर से बरेली में सैकड़ों की संख्या में लंगर आम होते हैं। आमतौर पर अधिकांश लंगरों में बिरयानी ही पकती है या फिर दूसरे मांसाहारी पकवान बनते रहे हैं।
शायद ये पहला मौका होगा, जब उर्से रजवी के लंगरों में बिरयानी नहीं बल्कि शाकाहारी लंगर चलेंगे। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां ने लंगर कमेटियों से अपील की है कि वे बिना गोश्त के लंगर का इंतजाम करें। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि सावन के महीने में उर्स हो रहा है। इसलिए सावन में जो व्यवस्थाएं लागू हैं। उनको ध्यान में रखना जरूरी है। सामाजिक सौहार्द का ख्याल भी रखना है। लिहाजा, मुहब्बत और भाईचार के साथ सभी व्यवस्थाएं बनी रहें। इसका ध्यान रखते हुए सभी लंगर कमेटियां लंगर के लिए शाकाहारी खाने की व्यवस्था करें। कहीं भी कोई व्यक्ति मांसाहारी पकवानों का लंगर न चलाएं।
खुले में बनता है लंगर
उर्से रजवी में लाखों की भीड़ उमड़ती है। सैकड़ों लंगर चलते। कई जगह तो खुले में भी लंगर होते हैं। ऐसे में दरगाह से यह कोशिश की गई कि सावन में खुलेआम मांसाहारी भोजन न बने। इसलिए यही बेहतर होगा कि इसे शाकाहारी में बदल दिया जाए। दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने दरगाह प्रमुख के पैगाम को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बरेली गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है। दरगाह प्रमुख ने यकीनन सराहनीय फैसला लिया है। लंगर कमेटियां निश्चित रूप से इसका पालन करेंगी।
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