इथेनॉल उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए संशोधित योजना मंजूर

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। सरकार ने देश में पहली पीढ़ी (1 जी) के इथेनॉल का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए अनाजों (चावल, गेंहू, जौ, मक्‍का और जवार), गन्‍ना, चुकन्‍दर आदि से इथेनॉल निकालने की क्षमता बढ़ाने के लिए एक संशोधित योजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की …

नई दिल्ली। सरकार ने देश में पहली पीढ़ी (1 जी) के इथेनॉल का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए अनाजों (चावल, गेंहू, जौ, मक्‍का और जवार), गन्‍ना, चुकन्‍दर आदि से इथेनॉल निकालने की क्षमता बढ़ाने के लिए एक संशोधित योजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की आज हुयी बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।

मिश्रण स्‍तर में वृद्धि से आयातित जैव ईंधन पर निर्भरता कम होगी और वायु प्रदूषण भी कम होगा। भट्टियों की क्षमता में वृद्धि/नयी भट्टियां लगाने से ग्रामीण इलाकों में नए रोजगार अवसरों का सृजन होगा और इस तरह आत्‍मनिर्भर भारत के लक्ष्‍य को प्राप्‍त किया जा सकेगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 2010-11 के चीनी सत्र से गन्‍ने की बेहतर किस्‍मों के आने के बाद देश में चीनी का अतिरिक्‍त उत्‍पादन हुआ है और उम्‍मीद है कि आने वाले वर्षों में भी यह रूख जारी रहेगा। सामान्‍य चीनी सत्र (अक्टूबर से सितम्‍बर) में करीब 320 लाख टन चीनी का उत्‍पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 260 लाख टन है। सामान्‍य चीनी सत्र में 60 लाख टन के इस अतिरिक्‍त उत्‍पादन से चीनी मिलों को अपनी कीमत तय करने में दबाव का सामना करना पड़ता है।

60 लाख मीट्रिक टन का यह अतिरिक्‍त भंडार बिक नहीं पाता और इस तरह चीनी मिलों का 19 हजार करोड़ रुपये की राशि फंस जाती है और उनकी पूंजी तरलता की स्थिति को प्रभावित करती है। परिणामस्‍वरूप वे गन्‍ना किसानों को उनके उत्‍पाद की बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पाती। चीनी के इस अतिरिक्‍त भंडार से निपटने के लिए चीनी मिलें चीनी का निर्यात करती हैं और इसके लिए उन्‍हें सरकार से वित्‍तीय सहायता मिलती है, लेकिन विश्‍व व्‍यापार संगठन की व्‍यवस्‍था के अनुरूप भारत, विकासशील देश होने के कारण सिर्फ 2023 तक ही चीनी के निर्यात के लिए वित्‍तीय सहायता दे सकता है। अत: इस अतिरिक्‍त गन्‍ने और चीनी का इथेनॉल के उत्‍पादन के लिए उपयोग करना ही चीनी के अतिरिक्‍त भंडार से निपटने का सही रास्‍ता है।

अतिरिक्‍त चीनी के इस उपयोग से मिलों द्वारा भुगतान किए जाने वाले चीनी के घरेलू मिल-मूल्‍य में स्थिरता आएगी और चीनी मिलों को इसके भंडारण की समस्‍या से निजात मिलेगी। इससे उनके पूंजी प्रवाह में सुधार होगा और उन्‍हें किसानों को उनके बकाया मूल्‍य का भुगतान करने में सुविधा होगी। इसके साथ ही इससे चीनी मिलों को आने वाले सालों में अपना कामकाज चलाने में भी मदद मिलेगी।

सरकार ने 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत और 2030 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण करने का लक्ष्‍य रखा है। चीनी क्षेत्र की सहायता के लिए और गन्‍ना किसानों के हित में सरकार ने बी-हैवी गन्‍ना शीरा, गन्‍ने के रस, शीरा और चीनी से इथेनॉल का उत्‍पादन करने की अनुमति दी है। इसके अलावा, उसने इथेनॉल सत्र के दौरान सी-हैवी गुड़ शीरा और बी-हैवी गुड़ शीरा तथा गन्‍ने के रस/चीनी/शीरा से निकाले जाने वाले इथेनॉल के लिए लाभकारी मिल-मूल्‍य भी तय किया है।

इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2020-21 के लिए सरकार ने अब विभिन्‍न अनाजों से निकाले जाने वाले इथेनॉल के मिल-मूल्‍य को भी बढ़ाया है। ईंधन स्‍तर के इथेनॉल के उत्‍पादन को बढ़ाने के लिए सरकार भट्टियों को भी भारतीय खाद्य निगम में उपलब्‍ध मक्‍का और चावल से इथेनॉल का उत्‍पादन करने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है। सरकार ने मक्‍का और चावल से निकाले जाने वाले इथेनॉल का लाभकारी मूल्‍य भी तय किया है। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्‍य को भी घटाकर कम करने की योजना बना रही है। हालांकि देश में इस समय चीनी के अतिरिक्‍त भंडार से इथेनॉल निकालने और उसकी आपूर्ति तेल विपणन कंपनियों को करने की पर्याप्‍त क्षमता नहीं है।

इसके अलावा, पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण के लक्ष्‍य को सिर्फ गन्‍ने और चीनी से इथेनॉल का उत्‍पादन कर प्राप्‍त नहीं‍ किया जा सकता तथा पहली पीढ़ी (1जी) के इथेनॉल का उत्‍पादन अन्‍य खाद्य वस्‍तुओं जैसे अनाज, चुकन्‍दर आदि से भी किए जाने की आवश्‍यकता होगी, जिसकी पर्याप्‍त क्षमता फिलहाल देश में नहीं है। अत: देश में पहली पीढ़ी के इथेनॉल का उत्‍पादन करने के लिए अनाजों (चावल, गेंहू, जौ, मक्‍का और ज्‍वार) गन्‍ने और चुकन्‍दर आदि से इथेनॉल निकालने की क्षमता को बढ़ाने की बहुत जरूरत है।

इस संशोधित योजना के तहत इथेनॉल उत्‍पादन के लिए अनाज आधारित भट्टियों की स्‍थापना करना/मौजूदा अनाज आधारित भट्टियों का विस्‍तार करना, लेकिन इस योजना के लाभ केवल उन्‍हीं भट्टियों को मिलेंगे, जो अनाजों की सूखी पिसाई की प्रक्रिया का इस्‍तेमाल करेंगी। इथेनॉल उत्‍पादन के लिए गुड़ शीरा आधारित नयी भट्टियों की स्थापना/मौजूदा भट्टियों का विस्‍तार (चाहे वे चीनी मिलों से संबद्ध हो या उनसे अलग हो) और चाहे केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा शून्‍य तरल डिस्‍चार्ज (जेडएलडी) को हासिल करने के लिए स्‍वीकृत कोई भी अन्‍य तरीका कायम करना हो। इथेनॉल उत्‍पादन के लिए अनाज और शीरा दोनों का दोहरा इस्‍तेमाल करने वाली नयी भट्टियां स्‍थापित करना और पहले से संचालित भट्टियों का विस्‍तार करना।

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