Monsoon Session : खान-खनिज विधेयक पर संसद की मुहर! विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यसभा से पास, अब खनन सेक्टर में होंगे ये बड़े बदलाव
कांग्रेस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर की नारेबाजी
राज्यसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया। लोकसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी। सरकार ने कहा कि विधेयक से राज्यों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे और खनिज क्षेत्र में कर-शुल्क की असमानता खत्म कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाएगा।
नई दिल्ली। राज्यसभा ने गुरुवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा में पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक के राज्यसभा से मंजूर होने के बाद इसे संसद की मंजूरी मिल गई है। विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने संबंधी डीएमके सांसद तिरुचि शिवा के प्रस्ताव और कुछ सदस्यों के संशोधन प्रस्ताव भी सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर कांग्रेस का हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग भी उठाई। हालांकि, विरोध के बीच खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने चर्चा का जवाब दिया और इसके बाद सदन ने विधेयक को पारित कर दिया।
इससे पहले सभापति ने जरूरी विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने सत्र के अंतिम दिन को देखते हुए सुबह के शून्यकाल और प्रश्नकाल की कार्यवाही के स्थान पर खान एवं खनिज विधेयक को पारित कराने का प्रस्ताव दिया है। सदन की राय लेने के बाद खान मंत्री को विधेयक पेश करने की अनुमति दी गई।
राज्यों के अधिकारों में दखल नहीं: जी. किशन रेड्डी
विधेयक पर जवाब देते हुए जी. किशन रेड्डी ने कहा कि संशोधन के जरिए केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि खनिज देश में रोजगार और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और विधेयक के प्रावधानों से राज्यों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि उनके राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
उन्होंने कहा कि देशहित में खनिजों के विनियमन का अधिकार केंद्र के पास है। सरकार का उद्देश्य देशभर में कर और शुल्क की राशि में असमानता खत्म कर व्यवस्था में एकरूपता लाना है।
राज्यों को राजस्व बढ़ने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम करेगी और उनके अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सूक्ष्म खनिजों के मामले में दखल नहीं देगी और मुख्य खनिजों पर ही ध्यान केंद्रित करेगी।
रेड्डी ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है, इसलिए खनन क्षेत्र में पारदर्शी और एक समान व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान राज्यों को कोयले से करीब 65 प्रतिशत राजस्व मिलता था, जबकि राजग सरकार में यह बढ़कर 85 प्रतिशत हो गया है।
क्या बदलेगा? राज्यों की कर लगाने की शक्तियों पर असर
विधेयक में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्तियों पर कुछ सीमाएं तय की गई हैं। सरकार का कहना है कि राज्यों की ओर से अलग-अलग तरीके से कर और शुल्क लगाए जाने से खनन क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही थीं।
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में कर की अलग दरें, खनन शुरू होने के बाद अचानक कर या उपकर लागू करना, खनिज उत्पादन अथवा डिस्पैच पर कई तरह के शुल्क लगाना और पिछली तारीख से कर एवं लेवी लागू करने जैसी व्यवस्थाओं से खनन उद्योग पर बोझ बढ़ता है।
खनन लागत घटाने और निवेश बढ़ाने पर जोर
सरकार के अनुसार इन असमानताओं के कारण खनन की लागत बढ़ती है और खनिजों की निकासी को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता। कई मामलों में खनन कार्य व्यावसायिक रूप से अव्यावहारिक भी हो सकते हैं। खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 का उद्देश्य इन्हीं समस्याओं को दूर कर देशभर में कर और शुल्क की व्यवस्था में एकरूपता लाना, खनन लागत को नियंत्रित करना और खनिज क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
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