Bareilly News : बेखौफ क्रांतिकारी विशन नारायण ने रोका था कप्तान का घोड़ा
चौरी-चौरा कांड के ठीक अगले दिन कुतुबखाना पर हुआ था जोरदार प्रदर्शन
चौरी-चौरा कांड के ठीक अगले दिन 5 फरवरी को बरेली में भी जगह-जगह प्रदर्शन हुए। गुलाबनगर के रहने वाले पंडित विशन नारायण कांग्रेसियों के एक जुलूस के साथ थे। ये जुलूस कुतुबखाना पहुंचा तो अंग्रेज अफसरों ने प्रदर्शनकारियों को रोकना चाहता, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जुनून सवार था।
अमृत विचार : रुहेलखंड की धरती पर क्रांति की एक कहानी खोजने निकलेंगे तो हजारों क्रांतिवीरों की गौरवगाथाएं मिल जाएंगी। सर उठाकर जीना जिनकी आदत और गुलामी की जंजीरों को तोड़ना मकसद था। ऐसे ही एक नायक थे पंडित विशन नारायण। असहयोग आंदोलन जब अपने चरम पर था तब बरेली में एक प्रदर्शन के दौरान बेखौफ क्रांतिकारी पंडित विशन नारायण ने पुलिस कप्तान के घोड़े की लगाम पकड़कर उसे रोक दिया था।
वर्ष 1922 में जब पूरे देश में असहयोग आंदोलन की गूंज थी। चौरी-चौरा कांड के ठीक अगले दिन 5 फरवरी को बरेली में भी जगह-जगह प्रदर्शन हुए। गुलाबनगर के रहने वाले पंडित विशन नारायण कांग्रेसियों के एक जुलूस के साथ थे। ये जुलूस कुतुबखाना पहुंचा तो अंग्रेज अफसरों ने प्रदर्शनकारियों को रोकना चाहता, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जुनून सवार था।
खींच दी घोड़े की लगाम
इस बीच वहां पुलिस कप्तान ईस्टव भी घोड़े पर सवार होकर आ गया। तभी प्रदर्शनकारियों के बीच से पंडित विशननारायण निकलकर आए और कप्तान के घोड़े की लगाम पकड़कर उसको रोक दिया।
गोली चलाने का आदेश
विशन नारायण की इस जुर्रत से कप्तान ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। जिसमें कई लोग घायल हुए थे। पंडित विशननारायाण को सजा सुनाकर दो साल के लिए जेल में डाल दिया गया।
अपनों से अलग, क्रांति की राह
पंडित छोटे लाल घंटे वाला को लेखक सुधीर विद्यार्थी अपनी पुस्तक बरेली एक कोलाज में एक ऐसे क्रांतिकारी के रूप में दर्ज करते हैं, जिसने क्रांति की राह में अपने परिवार को भी छोड़ दिया था।
जोगी नवादा के रहने वाले पंडित छोटे लाल सभाओं की घोषणा शहर भर में टहल कर घंटा बजाते हुए करते थे। जिसकी वजह से उनके नाम के साथ घंटेवाले को भी जोड़ दिया गया।
अपनी घंटा ध्वनी के साथ लोगों को कांग्रेस की सभाओं तक लेकर आना उनका जुनून था। वह साइनबोर्ड बनाकर अपना गुजारा चलाते थे।
