Tata Sons AGM पर मंडराया संकट! 18 अगस्त की बैठक पर सस्पेंस, चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के प्रस्ताव पर भी होना है फैसला

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AGM के लिए पांच सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी

टाटा संस की 18 अगस्त को प्रस्तावित AGM पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रमुख शेयरधारक सर रतन टाटा ट्रस्ट नियामकीय प्रतिबंधों के चलते AGM के लिए प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहा है। कोरम पूरा नहीं होने पर बैठक स्थगित हो सकती है।

नई दिल्ली, अमृत विचार। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की 18 अगस्त को प्रस्तावित वार्षिक आम बैठक (AGM) को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कंपनी की प्रमुख शेयरधारक सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) महाराष्ट्र के चैरिटी आयुक्त की ओर से लगाए गए नियामकीय प्रतिबंधों के चलते बैठक के लिए अपना प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रही है। ऐसे में निर्धारित तारीख पर AGM के आयोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, टाटा संस ने अभी तक शेयरधारकों को बैठक की तारीख में किसी बदलाव की सूचना नहीं दी है। मौजूदा परिस्थितियों में कंपनी AGM आयोजित करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने पर बैठक को स्थगित करना पड़ सकता है।

चंद्रशेखरन के निदेशक पद पर भी होना है फैसला

18 अगस्त की प्रस्तावित AGM में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी विचार होना है। चंद्रशेखरन ने फरवरी में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद एक और कार्यकाल के लिए नामांकन नहीं कराने का फैसला किया है। ऐसे में AGM के दौरान इस प्रस्ताव पर शेयरधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

66 फीसदी हिस्सेदारी वाले दो ट्रस्टों का पेच

मामला टाटा संस में एसआरटीटी की 23.56 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा है। ट्रस्ट मई में महाराष्ट्र के चैरिटी आयुक्त के आदेश के बाद अपने निदेशक मंडल की बैठक नहीं कर पा रहा है। आदेश में ट्रस्ट के बोर्ड के गठन से संबंधित जांच लंबित रहने तक प्रस्तावित बैठक स्थगित करने को कहा गया था। वहीं, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की टाटा संस में 27.98 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दोनों ट्रस्टों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है।

AGM के लिए पांच सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी

टाटा संस के अनुच्छेद 86 के मुताबिक AGM में कम से कम पांच सदस्यों की व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी है। इसमें एसआरटीटी और एसडीटीटी की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि भी शामिल है, बशर्ते दोनों ट्रस्टों की संयुक्त हिस्सेदारी 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो।

ऐसे में एसआरटीटी की ओर से प्रतिनिधि नामित नहीं किए जाने की स्थिति AGM के लिए जरूरी कोरम पर असर डाल सकती है। टाटा संस में शापूरजी पालोनजी परिवार की करीब 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी भी है।

बोर्ड बैठक की अनुमति नहीं, प्रतिनिधि नामित करने में अड़चन

मामले से सीधे परिचित एक व्यक्ति के मुताबिक मौजूदा स्थिति में एसआरटीटी को ट्रस्ट के निदेशक मंडल की बैठक करने के लिए चैरिटी आयुक्त से अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में यदि ट्रस्ट बोर्ड की बैठक नहीं कर सकता, तो AGM में भाग लेने के लिए संयुक्त रूप से प्रतिनिधि नामित करना भी मुश्किल है। अब निगाहें 18 अगस्त की AGM पर हैं। कंपनी बैठक आयोजित करने की कोशिश करती है या कोरम के अभाव में इसे स्थगित करना पड़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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