Moradabad News: सावरकर पर सवाल पूछने वाले शिक्षक के निलंबन पर महासंघ नाराज, बोले- तत्काल बहाल हों गुरु प्रसाद 

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Edited By Anjali Singh
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सावरकर पर प्रश्न पूछने को लेकर शिक्षक के निलंबन का विरोध, महासंघ ने निष्पक्ष जांच और तत्काल बहाली की मांग उठाई

सावरकर से जुड़े प्रश्न पूछने पर केरल में शिक्षक गुरु प्रसाद के निलंबन का मामला गरमा गया है। मुरादाबाद में शैक्षिक महासंघ ने ज्ञापन देकर निलंबन वापस लेने और शिक्षक को बहाल करने की मांग की।

मुरादाबाद, अमृत विचार। केरल के कासरगोड जिले में विद्यालयी सोशल साइंस फ्रीडम क्विज में विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछने पर शिक्षक गुरु प्रसाद के निलंबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मुरादाबाद माध्यमिक संवर्ग ने शिक्षक के निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री, केरल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन कलक्ट्रेट में प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिक्षक गुरु प्रसाद को तत्काल सेवा में बहाल करने की मांग की।

'सावरकर पर प्रश्न पूछना न अपराध, न अनुशासनहीनता'

प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए दंड और अंडमान की सेलुलर जेल में कारावास का अध्ययन इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछना न तो अपराध है और न ही अनुशासनहीनता। उनके विचारों से सहमति या असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को इतिहास से बाहर नहीं किया जा सकता।

शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग

महासंघ ने शिक्षक गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लेकर उन्हें सेवा में बहाल करने की मांग की। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा शिक्षकों की अकादमिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ उनकी गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। मंडल उपाध्यक्ष मेजर सुदेश कुमार भटनागर ने कहा कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न को लेकर शिक्षक का निलंबन वैचारिक और राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका पैदा करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना जरूरी है।

'प्रश्नावली को मंजूरी मिली थी तो अकेले शिक्षक पर कार्रवाई क्यों'

जिला मंत्री डॉ. विशेष कुमार शर्मा ने कहा कि यदि संबंधित प्रश्नावली उप जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर से अनुमोदित होने के बाद विद्यालयों में भेजी गई थी, तो कथित त्रुटि के लिए केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। जिला उपाध्यक्ष श्यामवीर सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत में अलग-अलग सरकारों और राजनीतिक विचारधाराओं ने सावरकर को ऐतिहासिक व्यक्तित्व के तौर पर स्वीकार किया है।

उन्होंने पोर्ट ब्लेयर के हवाई अड्डे का नाम वीर सावरकर के नाम पर होने, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किए जाने और संसद भवन में उनका चित्र स्थापित होने का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में विद्यालयी क्विज में सावरकर से संबंधित प्रश्न शामिल होना गंभीर शैक्षिक अपराध कैसे माना जा सकता है। ज्ञापन देने वालों में डॉ. अमित कुमार शर्मा, खेमपाल शर्मा, रामभरोसे शर्मा समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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