Chamoli Tunnel News : तपोवन-विष्णुगाड परियोजना की सुरंग में भूधंसाव से बनी ‘कैविटी’, पानी रिसा तो मचा हड़कंप; सभी श्रमिक बाहर निकाले

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सुरक्षा के चलते टनलिंग का काम रोका गया, एनटीपीसी बोली- फिलहाल कोई खतरा नहीं

चमोली में एनटीपीसी की 520 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग में टनलिंग के दौरान कैविटी बनने से पानी का रिसाव हुआ। सुरक्षा के चलते सभी श्रमिकों को बाहर निकालकर काम रोक दिया गया है। एनटीपीसी के मुताबिक फिलहाल कोई खतरा नहीं है और विशेषज्ञ टीम कैविटी के उपचार में जुटी है।

गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले में तपोवन-ज्योतिर्मठ क्षेत्र स्थित 520 मेगावाट की एनटीपीसी तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग में भूधंसाव के कारण छोटी ‘कैविटी’ बनने और पानी का रिसाव होने से हड़कंप मच गया। एहतियात के तौर पर सुरंग में काम कर रहे सभी श्रमिकों को तत्काल बाहर निकाल लिया गया और खुदाई का काम रोक दिया गया।

एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह जयाड़ा ने बताया कि 15 अगस्त की सुबह परियोजना के डीबीएम क्षेत्र में टनलिंग के दौरान छोटी कैविटी बनी थी। इसके बाद वहां हल्का पानी रिसने लगा। सूचना मिलते ही प्रभावित हिस्से में काम बंद कराया गया और सुरक्षा की दृष्टि से सभी श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया।

कैविटी का उपचार पूरा होने तक बंद रहेगी टनलिंग

एनटीपीसी के मुताबिक टनलिंग के दौरान इस तरह की छोटी कैविटी बनना भूगर्भीय परिस्थितियों में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल इससे किसी तरह के संभावित खतरे की स्थिति नहीं है। हालांकि, सुरक्षा मानकों के तहत कैविटी का उपचार किए बिना सुरंग की खुदाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। विशेषज्ञ श्रमिकों की टीम प्रभावित हिस्से के उपचार में जुटी है। सुरंग को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। उपचार पूरा होने के बाद ही टनलिंग का काम दोबारा शुरू किया जाएगा।

पहले भी प्राकृतिक आपदा से जूझ चुकी है परियोजना

तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना का निर्माण करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था और इसका सफर प्राकृतिक आपदाओं एवं भूगर्भीय चुनौतियों से प्रभावित रहा है। फरवरी 2021 में ऋषिगंगा घाटी में आई विनाशकारी बाढ़ ने परियोजना के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था। इस आपदा में करीब 200 लोगों की जान गई थी और परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा था।

इससे पहले भी परियोजना की सुरंगों में पानी के रिसाव और कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होता रहा है। सैलंग गांव के पास बिजलीघर की ओर जाने वाली मुख्य सुरंग में पानी आने के कारण करोड़ों रुपये की लागत वाली टनल बोरिंग मशीन (TBM) लंबे समय तक फंसी रही थी।

हिमालयी क्षेत्र में निर्माण की चुनौती फिर सामने

ताजा घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान आने वाली भूगर्भीय चुनौतियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, एनटीपीसी का कहना है कि प्रभावित हिस्से को सुरक्षित बनाने के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत उपचार किया जा रहा है।

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