Bareilly News: रामगंगा का 159.500 मीटर पहुंचा जलस्तर, अगले 48 घंटे बढ़ सकता है पानी; तटीय गांवों में अलर्ट
बरेली में रामगंगा नदी का जलस्तर 159.500 मीटर पहुंच गया है। खो बैराज से 45,756 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद अगले 24 से 48 घंटे में जलस्तर एक मीटर से अधिक बढ़ने की आशंका है। तटीय गांवों और खेतों में पानी पहुंचने का खतरा देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
बरेली, अमृत विचार। पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और खो बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद रामगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार शाम चौबारी गेज स्थल पर जलस्तर 159.500 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ खंड के अधिकारियों के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटे में जलस्तर एक मीटर से अधिक बढ़ने की आशंका है। बुधवार शाम तक नदी का जलस्तर 160 मीटर तक पहुंच सकता है। ऐसे में तटीय गांवों और खेतों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
खो बैराज से छोड़ा गया 45,756 क्यूसेक पानी
बाढ़ खंड के एक्सईएन नीजर कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। रामगंगा में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मंगलवार शाम चार बजे खो बैराज से 45,756 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे रामगंगा के जलस्तर में आने वाले घंटों में और वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा रामगंगा और उसकी सहायक नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में भी लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
तटीय गांवों और खेतों पर बढ़ा खतरा
जलस्तर बढ़ने की स्थिति में चौबारी गेज स्थल के आसपास बसे तटीय गांवों और खेतों में पानी पहुंच सकता है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व को पत्र भेजकर नदी की स्थिति और जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी की जानकारी दी गई है। वहीं बाढ़ राहत चौकियों पर 24 घंटे निगरानी के लिए सिंचाई, राजस्व और बाढ़ खंड की टीमें तैनात की गई हैं।
तटबंधों की निगरानी बढ़ाई गई
अधिकारियों ने लेखपालों और राजस्व कर्मियों को नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को जलस्तर बढ़ने की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में तटबंधों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। फिलहाल सभी तटबंध सुरक्षित बताए जा रहे हैं। प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जलस्तर में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए आने वाले दो दिन तटीय इलाकों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
