फुटपाथ पर पैदल चलना भी मौलिक अधिकार
पांच साल के एक बच्चे की सड़क हादसे में मौत हो गई। वहां न फुटपाथ था और न ही सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था। सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सुरक्षित और निर्धारित पैदल मार्ग पर चलना भी आवागमन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
सड़क पर पैदल चलना मौलिक अधिकार है, लेकिन आज भारत के कई शहरों में पैदल चलना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। आज भी बहुत से शहरों में फुटपाथ या तो बने ही नहीं हैं, या उन पर अतिक्रमण, पार्किंग और निर्माण सामग्री के कारण लोगों के चलने की जगह नहीं बचती। ऐसे में यहां पर प्रश्न यह उठता है कि जब किसी व्यक्ति के पास सड़क पर सुरक्षित रूप से पैदल चलने की जगह ही नहीं है, तो उसे वास्तव में आवागमन की आजादी कैसे मिल सकती है?
कुछ समय पहले ही यानी कि 19 जून 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सुरक्षित और निर्धारित पैदल मार्ग पर चलना भी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत आवागमन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। वास्तव में, यह मामला उस दुखद घटना से जुड़ा हुआ था, जिसमें पांच साल के एक बच्चे की सड़क पर टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
वहां न फुटपाथ था और न ही सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था। आज कई भारतीय शहरों में फुटपाथ पर अतिक्रमण, टूटे या गायब फुटपाथ, सड़क पार करने के लिए अपर्याप्त क्रॉसिंग, तेज रफ्तार वाहन और यातायात नियमों का उल्लंघन पैदल यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ाते हैं और हमारे देश में पैदल यात्रियों की सुरक्षा अभी भी एक गंभीर चुनौती है।
'भारत में सड़क दुर्घटनाएं-2023 के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 35,221 पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई, जो कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 20.4% थी। सच तो यह है कि आज पर्याप्त पैदल यात्री बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है। फुटपाथों का निर्माण और रखरखाव मुख्यतः राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के दायरे में आता है, इसलिए सरकारों और संबंधित निकायों को इन पर ध्यान देना चाहिए।
यहां पाठकों को बताता चलूं कि वैसे विश्व में सड़क की गुणवत्ता, फुटपाथ, पैदल पार-पथ, ट्रैफिक नियंत्रण और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के मामलों में नीदरलैंड को दुनिया के सबसे अच्छे उदाहरणों में गिना जाता है। सच तो यह है कि नींदरलैंड पैदल चलने के लिए दुनिया में एक अग्रणी देश है, जहां पैदल और साइकिल यात्रियों के लिए अलग एवं सुरक्षित मार्ग, कम गति वाले क्षेत्र और बेहतर सड़क डिजाइन उपलब्ध हैं।
नींदरलैंड के बाद डेनमार्क विशेषकर कोपेनहेगन में पैदल यात्रियों के लिए सुव्यवस्थित फुटपाथ, क्रॉसिंग और ट्रैफिक-शांत क्षेत्र हैं। वहीं पर स्वीडन विश्व में कम पैदल मृत्यु दर और मजबूत सड़क-सुरक्षा व्यवस्था के कारण अग्रणी देशों में शामिल है। नॉर्वे (यूरोप में) तथा फिनलैंड भी पैदल मार्गों और सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था के मामले में विश्व में अहम और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। (ये लेखक के निजी विचार हैं)
