समुद्र में ‘मुसीबत का साथी’ बना INS निपुण, जानिए कैसे बचाएगा लोगों और नौसैनिकों की जान

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ 10,500 टन का डाइविंग सपोर्ट जहाज, 300 मीटर गहराई तक जाने में सक्षम; पनडुब्बी बचाव से लेकर आपदा राहत और मेडिकल मदद तक करेगा काम

मुंबई: भारतीय नौसेना की ताकत में सोमवार को एक और महत्वपूर्ण इजाफा हुआ है। गहरे समुद्र में जाने और परेशानी में फंसी पनडुब्बियों को तुरंत मदद देने में सक्षम डाइविंग सपोर्ट जहाज आईएनएस निपुण को मुंबई में नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मौजूदगी में इसका कमीशनिंग समारोह हुआ।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इसे बनाया है। पोत की लंबाई 119.4 मीटर और क्षमता 10,500 टन है। यह समुद्र में 300 मीटर की गहराई तक जाकर अभियान चला सकता है। इसकी भूमिका सिर्फ सैन्य अभियानों तक ही सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसे आपदा राहत और मानवीय सहायता अभियानों में भी शामिल किया जा सकता है।

INS Nipun

आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है INS निपुण?

आईएनएस निपुण की अहमियत सिर्फ नौसेना की ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं है। समुद्र में होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं और आपात के समय इसकी क्षमताएं आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी हो सकती हैं।

मान लीजिए की अगर समुद्र में कोई बड़ा हादसा होता है, कोई जहाज या पनडुब्बी संकट में फंसती है या गहरे पानी में बचाव अभियान चलाना पड़ता है, तो निपुण जैसी क्षमता वाला जहाज राहत और बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचाने और कठिन ऑपरेशन में मदद कर सकता है। इसमें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी मौजूद हैं, इसलिए समुद्र में घायल या बचाए गए लोगों को तुरंत इलाज दिया जा सकता है।

यानी आसान भाषा में समझें तो समुद्र में किसी बड़े संकट के समय INS निपुण एक चलती-फिरती बचाव, तकनीकी सहायता और मेडिकल सुविधा के रूप में काम कर सकता है।

INS Nipun (2)

क्या है INS निपुण?

आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना का वर्ल्ड क्लास डाइविंग सपोर्ट जहाज है। इसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम ने किया है।

इसे 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। इसके बाद इसके परीक्षण और नौसेना में शामिल किए जाने की अंतिम तैयारियां चल रही थीं।

‘निपुण’ संस्कृत का एक शब्द है, जिसका मतलब है किसी कठिन काम में बेहद कुशल या पारंगत होना है। जहाज की क्षमताओं को देखते हुए इसका नाम इसपर फिर बैठ रहा है।

75 से 80 फीसदी तक स्वदेशी तकनीक

आईएनएस निपुण के निर्माण में करीब 75 से 80 प्रतिशत स्वदेशी कल-पुर्जों और सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के क्लासिफिकेशन नियमों के तहत किया गया है।

नौसेना के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी ताकत केवल इसकी रफ्तार नहीं बल्कि लंबे समय तक समुद्र में टिककर कठिन अभियानों को पूरा करने की क्षमता है।

गहरे समुद्र में गोताखोरों के लिए खास व्यवस्था

गहरे समुद्र में गोताखोरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ज्यादा गहराई पर पानी का दबाव बढ़ जाता है और गोताखोरों को बार-बार सतह पर आने-जाने से ‘डीकंप्रेशन सिकनेस’ जैसी गंभीर समस्या का खतरा रहता है।

आईएनएस निपुण में इसके लिए सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम भी मौजूद है। इसमें गोताखोरों के रहने के लिए विशेष दबावयुक्त चेंबर है। यह चेंबर गहराई के अनुरूप दबाव बनाए रखता है, जिससे गोताखोर लंबे समय तक गहराई में रहकर मरम्मत, खोज और दूसरे जरूरी काम भी बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं।

इस सिस्टम में गोताखोरों को हीलियम-ऑक्सीजन यानी हीलियॉक्स मिश्रण वाले वातावरण में भी तैयार किया जा सकता है।

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पनडुब्बी हादसे में बनेगा ‘मदर शिप’

आईएनएस निपुण की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक है पनडुब्बी बचाव अभियान।

अगर समुद्र की गहराई में कोई पनडुब्बी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और उसके अंदर नौसैनिक फंस जाते हैं, तो निपुण डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) के लिए मदर शिप के रूप में काम करेगा।

डीएसआरवी को निपुण से लॉन्च और नियंत्रित किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल समुद्र के नीचे फंसे नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया जाता है।

लहरों के बीच भी एक जगह स्थिर रह सकेगा जहाज

गहरे समुद्र में बचाव या डाइविंग ऑपरेशन के दौरान जहाज का एक स्थान पर स्थिर रहना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए निपुण में डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है।

कंप्यूटर, सैटेलाइट नेविगेशन, सेंसर और विशेष थ्रस्टर्स की मदद से जहाज लहरों और हवा के बीच भी अपनी स्थिति को स्थिर बनाए रख सकता है। इससे गहरे पानी में चलने वाले जटिल अभियानों की सुरक्षा और सटीकता बढ़ती है।

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जहां इंसान नहीं जा सकता, वहां रोबोट करेगा काम

गहरे समुद्र में हर जगह गोताखोरों को भेजना सुरक्षित नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में आईएनएस निपुण से रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROV) भेजे जा सकते हैं।

कैमरों और अन्य उपकरणों से लैस ये रोबोट समुद्र की गहराई में जाकर लाइव तस्वीरें और जरूरी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। इससे खतरनाक इलाकों में पहले इंसानों को भेजने का जोखिम कम किया जा सकता है।

जहाज पर अस्पताल और ICU भी

आईएनएस निपुण को मेडिकल इमरजेंसी के लिहाज से भी तैयार किया गया है। जहाज पर आठ बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल, ICU, ऑपरेशन थिएटर और टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध है।

इसका मतलब है कि समुद्र में किसी अभियान के दौरान घायल हुए नौसैनिकों या बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सकती है।

इसके अलावा आपातकालीन परिवहन और राहत अभियानों के लिए जहाज पर समर्पित हेलीकॉप्टर डेक भी मौजूद है।

दोनों समुद्री तटों पर मजबूत होगी बचाव क्षमता

भारत की समुद्री तटरेखा करीब 7,500 किलोमीटर लंबी है। इस श्रेणी का पहला डाइविंग सपोर्ट जहाज आईएनएस निस्तार जुलाई 2025 में नौसेना में शामिल हुआ था और विशाखापत्तनम में पूर्वी समुद्री तट पर तैनात है।

अब मुंबई में आईएनएस निपुण के शामिल होने से पश्चिमी समुद्री तट पर भी इस तरह की क्षमता उपलब्ध होगी। इससे देश के दोनों प्रमुख समुद्री तटों पर गहरे समुद्र में बचाव और सहायता अभियानों की क्षमता मजबूत होगी।

2026 में नौसेना का आठवां स्वदेशी प्लेटफॉर्म

आईएनएस निपुण वर्ष 2026 में भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला आठवां स्वदेशी प्लेटफॉर्म है। इससे पहले आईएनएस अंजदीप, आईएनएस तारागिरी, आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक, आईएनएस अग्रे, आईएनएस महेंद्रगिरी और आईएनएस मालवन नौसेना का हिस्सा बन चुके हैं।

यह उपलब्धि भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हिंद महासागर में भारत की भूमिका और मजबूत

भारत ने कई देशों के साथ पनडुब्बी बचाव विशेषज्ञता साझा करने के लिए द्विपक्षीय समझौते किए हैं। आईएनएस निपुण के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में किसी समुद्री आपात स्थिति के दौरान भारत की फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में भूमिका और मजबूत हो सकती है।

इससे न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय देशों के लिए आपदा और बचाव अभियानों में भारत की मदद करने की क्षमता भी मजबूत होगी।

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