UP Defence Corridor : कानपुर बनेगा देश का बड़ा रक्षा निर्माण केंद्र, निवेश से रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सप्लाई चेन से लेकर स्किल डेवलपमेंट तक पर मंथन, एमएसएमई को रक्षा उद्योग से जोड़ने पर जोर
कानपुर को देश का प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी तेज हो गई है। बुधवार को ओआरएफ और यूपी सरकार की साझेदारी में कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप आयोजित हुई, जिसमें एमएसएमई को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने, निवेश बढ़ाने, कौशल विकास, रिसर्च और नई तकनीक पर जोर दिया गया।
कानपुर, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के अगले चरण की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बुधवार को ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और प्रदेश सरकार की साझेदारी में कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप आयोजित की गई। इसमें रक्षा उत्पादन के साथ कौशल विकास, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और एमएसएमई को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि रक्षा कॉरिडोर का लक्ष्य सिर्फ बड़े उद्योग और उत्पादन इकाइयां स्थापित करना नहीं है। इसके लिए स्थानीय उद्योगों, शोध संस्थानों, कुशल मानव संसाधन और एमएसएमई को एक साथ जोड़कर मजबूत रक्षा आपूर्ति श्रृंखला तैयार करनी होगी।
रक्षा कॉरिडोर को जमीन पर उतारने में जुटा प्रशासन
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन कानपुर में रक्षा कॉरिडोर को धरातल पर उतारने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पूर्व का मैनचेस्टर' कानपुर देश के बड़े रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है। ओआरएफ के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा कि भारत सरकार रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटाकर देश में ही उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने बताया कि ओआरएफ की 'स्ट्रैटेजिक उत्तर प्रदेश' पहल के जरिए रक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाने और यूपीडीआईसी में निवेश बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
आईआईटी कानपुर और बीएचयू के शोध का मिलेगा लाभ
सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि यूपीडीआईसी उत्तर प्रदेश को हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि सरकार ने आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग किया है, ताकि कॉरिडोर में विज्ञान, अनुसंधान और नई तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल हो सके। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में सरकार, उद्योग, रक्षा उत्पादक, शोध संस्थान, नीति निर्माता और एमएसएमई के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
युवाओं के कौशल विकास पर जोर
डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने कहा कि कानपुर में रक्षा उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के साथ युवाओं के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना होगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू में हो रहे शोध का लाभ आईटीआई और स्थानीय तकनीकी संस्थानों तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के सहयोग से प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर बढ़ने से युवाओं को रोजगार मिलेगा और रक्षा क्षेत्र के लिए स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन तैयार होगा।
टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की चुनौतियों पर चर्चा
कार्यशाला में स्थानीय उद्योगों और एमएसएमई के सामने आने वाली टेस्टिंग, गुणवत्ता जांच, ट्रायल और सर्टिफिकेशन जैसी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पीके सैनी ने कहा कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों की भागीदारी के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने साझा परीक्षण सुविधाओं तक उद्योगों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।
असेंबलिंग नहीं, देश में बने डिजाइन और तकनीक
कार्यशाला में 'मेक इन इंडिया' का दायरा और व्यापक करने की जरूरत बताई गई। वक्ताओं ने कहा कि विदेशों से केवल कलपुर्जे मंगाकर असेंबल करने के बजाय देश में ही डिजाइन, बौद्धिक संपदा, सॉफ्टवेयर और उन्नत तकनीक विकसित की जानी चाहिए। कानपुर में पहले से मौजूद मजबूत इंजीनियरिंग और विनिर्माण आधार को रक्षा उद्योग के विकास के लिए बेहद उपयोगी बताया गया।
कानपुर में एमआरओ और स्पेयर पार्ट्स हब की संभावना
यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने कहा कि उद्योग और निवेशक कानपुर को रक्षा कॉरिडोर के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहे हैं। टीकेएमएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने कहा कि भारत में काम कर रही विदेशी रक्षा कंपनियां देश के बड़े बाजार को देखते हुए यहां निवेश और सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं। कार्यशाला में कानपुर को बड़ी रक्षा कंपनियों से जोड़ने के साथ मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) और स्पेयर पार्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
डिफेंस तकनीक का नागरिक क्षेत्र में भी होगा इस्तेमाल
वक्ताओं ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में विकसित होने वाली तकनीकों का फायदा सिर्फ सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीकों को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जिनका इस्तेमाल नागरिक उद्योगों में भी किया जा सकेगा। इससे कानपुर के औद्योगिक और कारोबारी क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
उद्यमियों की समस्याओं को नीति में मिलेगी जगह
कार्यशाला में नीति निर्माण में 'बॉटम-अप' दृष्टिकोण अपनाने पर भी सहमति बनी। इसके तहत उद्यमियों और उद्योगपतियों की जमीनी समस्याओं और वित्तीय चुनौतियों को नीति तैयार करते समय शामिल किया जाएगा, ताकि नियम अधिक पारदर्शी और उद्योगों के लिए सुगम बनाए जा सकें। कानपुर में रक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी बताई गई। आयोजकों के अनुसार, कानपुर के बाद झांसी में रीजनल डिफेंस वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। वर्ष के अंत में लखनऊ में प्रस्तावित डिफेंस कॉन्क्लेव में इन चर्चाओं और सिफारिशों के आधार पर आगे की नीतिगत दिशा तय की जाएगी।
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