Sambhal News : संभल: स्कूल की बदली तस्वीर, 425 बच्चों का हुआ दाखिला, प्रधानाध्यापक ब्रजकिशोर को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
संभल के रसूलपुर स्कूल की बदली सूरत, मेहनत लाई रंग, ब्रजकिशोर को 'राज्य अध्यापक पुरस्कार'
संभल के कंपोजिट विद्यालय रसूलपुर की तस्वीर बदलने वाले प्रधानाध्यापक ब्रजकिशोर को शिक्षक दिवस पर राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
संभल/ बबराला, अमृत विचार। जिस सरकारी स्कूल में कभी बच्चों की कम संख्या और कक्षाओं में सन्नाटा चिंता का कारण हुआ करता था, आज उसी विद्यालय में 425 बच्चे पढ़ रहे हैं। 80 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी नियमित स्कूल पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं, यहां छात्राओं का नामांकन भी छात्रों से अधिक है। गांव रसूलपुर के कंपोजिट विद्यालय की बदली तस्वीर किसी एक दिन का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अभिभावकों से संवाद और शिक्षक टीम की लगन का परिणाम है। इसी बदलाव की अगुवाई करने वाले प्रधानाध्यापक ब्रजकिशोर का चयन अब राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है।
वर्ष 2015 में जब ब्रजकिशोर ने कंपोजिट विद्यालय रसूलपुर के प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी संभाली, तब विद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को नियमित स्कूल तक लाना और अभिभावकों का भरोसा जीतना थी। नामांकन कम था और विद्यार्थियों की उपस्थिति भी संतोषजनक नहीं थी। विद्यालय के शैक्षिक और भौतिक वातावरण में भी सुधार की जरूरत थी। ब्रजकिशोर ने समस्या को केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अभिभावकों से लगातार संपर्क शुरू किया। बैठकों में बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति को लेकर बातचीत की गई। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को फोन कर बच्चों के स्कूल न आने की जानकारी दी गई। धीरे-धीरे इसका असर दिखाई देने लगा और स्कूल से दूर रहने वाले बच्चे नियमित रूप से कक्षा में पहुंचने लगे।
कमजोर बच्चों पर भी दिया विशेष ध्यान
बबराला। विद्यालय में पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को अलग से चिह्नित कर उनकी प्रगति पर विशेष ध्यान दिया गया। शिक्षक टीम ने ऐसे बच्चों के साथ अतिरिक्त मेहनत की। वहीं विद्यालय प्रबंध समिति और ग्रामीणों को भी स्कूल की गतिविधियों से जोड़ा गया। इससे विद्यालय और अभिभावकों के बीच दूरी कम हुई और शिक्षा को लेकर ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी। लगातार प्रयासों का परिणाम यह रहा कि विद्यालय में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती गई। आज विद्यालय में 425 विद्यार्थी पंजीकृत हैं और 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के इस विद्यालय की खास उपलब्धि यह भी है कि यहां छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है।
स्कूल को बदला, अब प्रदेश में मिलेगा सम्मान
ब्रजकिशोर ने प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी को केवल कार्यालयी काम तक सीमित नहीं रखा। बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना, कमजोर विद्यार्थियों को आगे लाना, शैक्षिक गुणवत्ता सुधारना और अभिभावकों को विद्यालय से जोड़ना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बना। शिक्षक टीम के सहयोग से किए गए इन प्रयासों ने वर्षों में विद्यालय की तस्वीर बदल दी।
अब इसी मेहनत को प्रदेश स्तर पर पहचान मिलने जा रही है। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चयनित शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। इसी समारोह में ब्रजकिशोर को राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के तहत 25 हजार रुपये की नकद राशि, प्रशस्ति पत्र और दो वर्ष का सेवा विस्तार दिया जाता है। ब्रजकिशोर के चयन की खबर से रसूलपुर के ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है।
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