Barabanki News: बचा सकते नहीं, इसलिए घर तोड़ना मजबूरी; आंखों के सामने देख रहे नदी में डूबते घर, खेत 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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बाराबंकी, अमृत विचार। सरयू नदी की कटान अब किसानों के खेतों तक सीमित नहीं रह गई है। सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र में हेतमापुर से केदारीपुर तक नदी लगातार किनारे की जमीन काट रही है। तेज कटान के चलते सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी। आबादी की ओर कटान बढ़ते देख परिवार अपने पक्के मकानों को खुद तोड़ने लगे हैं। केदारीपुर निवासी मोनू शुक्ला और छोटेलाल शुक्ला के परिवार कटान की भयावहता से सबसे अधिक प्रभावित हैं। 

रिहायशी इलाकों में बढ़ रहा जलस्तर 

_house is a compulsion

नदी लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है। ऐसे में दोनों परिवार अपने पक्के मकानों को खुद तोड़कर ईंट और अन्य उपयोगी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों परिवारों की करीब 70 बीघा जमीन पहले ही घाघरा में समा चुकी है। अब मकानों पर संकट खड़ा होने से परिवारों के सामने रहने की जगह की चिंता भी बढ़ गई है। 

घाघरा में समा रहे मकान खेत 

ग्रामीणों ने कटान रोकने के लिए अपने स्तर पर तमाम प्रयास किए, लेकिन नदी की तेज धारा के आगे सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे। वर्षों की मेहनत से तैयार उपजाऊ जमीन आंखों के सामने नदी में समाने के बाद अब मकान बचाना भी मुश्किल हो गया है। घर तोड़ते समय परिवारों के सामने वर्षों की कमाई से बनाए आशियाने को उजड़ता देखने की मजबूरी है। 

 मुआवजा देने की मांग 

प्रशासन की ओर से नदी की धारा को रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर झाल, टहनियां और अन्य सामग्री डाली जा रही पर ग्रामीणों का कहना है कि तेज बहाव के कारण इन प्रयासों का अपेक्षित असर नहीं दिख रहा और कटान लगातार जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र का तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।

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