Sambahl News : संभल में स्वयं सहायता समूह के लड्डुओं ने भर दी अनुपम के जीवन में मिठास, मेहनत के दम पर खड़ा कर दिया सफल कारोबार
70 हजार का कर्ज लेकर शुरू किया कारोबार, अब 12 इंटर कॉलेजों तक पहुंच रहे उत्पाद
अनुपम कहती हैं कि एक समय ऐसा था जब 1500 रुपये की नौकरी छूटने के बाद परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। आज 50 से 55 हजार रुपये महीने का कारोबार कर रही हूं और समूह की दूसरी महिलाओं को भी काम दे पा रही हूं। इससे आत्मविश्वास बढ़ा है। ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर को पहचानकर चूल्हे-चौके से आगे बढ़ना चाहिए।
अमृत विचार : परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, अगर हौसला और हुनर साथ है तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। बनियाखेड़ा ब्लॉक के गांव जैरोई हयातनगर निवासी 35 वर्षीय अनुपम ने इसकी मिसाल पेश की है। कभी निजी स्कूल में महज 1500 रुपये महीने की नौकरी करने वाली अनुपम आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर 50 से 55 हजार रुपये महीने का कारोबार कर रही हैं। एनआरएलएम के स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद शुरू हुआ उनका सफर अब लड्डू और देसी नमकीन के कारोबार तक पहुंच गया है।
संभल की अनुपम स्नातक हैं। वर्ष 2020 से पहले अपने पति के साथ गांव के ही निजी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाती थीं। दोनों की मामूली आमदनी से किसी तरह परिवार का खर्च चलता था। कोविड काल में स्कूल बंद हुआ तो नौकरी भी चली गई। आमदनी का जरिया खत्म होने के बाद परिवार आर्थिक संकट में घिर गया। इसी दौर में अनुपम ने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय वर्ष 2020 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित संजीवन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया।
वर्ष 2021 में समूह के माध्यम से अनुपम ने 70 हजार रुपये का ऋण लिया और गांव में ब्यूटी पार्लर तथा जनरल स्टोर शुरू किया। मेहनत का नतीजा यह रहा कि जिस कर्ज को चुकाने के लिए 10 महीने की अवधि थी, उसे उन्होंने महज आठ महीने में चुका दिया। इसके बाद भी करीब 20 हजार रुपये की शुद्ध बचत की। इस सफलता ने अनुपम का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने कारोबार को आगे बढ़ाने का फैसला किया। विस्तार देने के लिए अनुपम ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से 20 दिन का प्रशिक्षण लिया।
2024 में उन्होंने समूह के सीआईएफ फंड से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर रामदाना, रागी, ज्वार और बाजरा से मल्टीग्रेन पौष्टिक लड्डू तथा घर पर भुने देसी चने की नमकीन तैयार करने का काम शुरू किया। नवंबर 2024 से चंदौसी के 12 प्रमुख इंटर कॉलेजों में बच्चों के लिए करीब 2.80 लाख रुपये के लड्डुओं की आपूर्ति की गई।
इनसेट
अब कई जनपदों तक फैला कारोबार
अनुपम का कारोबार अब संभल तक सीमित नहीं है। उनके उत्पाद मुरादाबाद और अमरोहा सहित कई जनपदों तक भी पहुंच रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अमरोहा में उनके समूह ने 22,600 रुपये के उत्पाद बेचे। वर्ष 2025 में अकेले संभल जिले में 3.86 लाख रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हुई। विभिन्न आयोजनों और प्रशासनिक कार्यक्रमों के ऑर्डर पर उन्हें करीब 20 प्रतिशत तक शुद्ध मुनाफा मिल जाता है।
वर्ष 2025 में लागत निकालने के बाद करीब 3.05 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 1.86 लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है। संजीवन स्वयं सहायता समूह में 10 महिलाएं हैं। जब बड़े ऑर्डर मिलते हैं तो अनुपम समूह की दूसरी महिलाओं को भी काम देती हैं और उन्हें मेहनत के अनुसार पारिश्रमिक देती हैं।
राखियों से लेकर लड्डू तक
रक्षाबंधन के अवसर पर जिला प्रशासन ने अनुपम को 28 अगस्त को कलेक्ट्रेट सभागार में स्टॉल लगाने का अवसर दिया है। स्टॉल पर हाथ से तैयार की गईं मोतियों की राखियां, तिरंगा राखियां, रामदाना और मल्टीग्रेन लड्डू तथा देसी नमकीन उपलब्ध हैं। अनुपम समूह सखी के रूप में अन्य महिलाओं को आजीविका और स्वास्थ्य सखी जैसी गतिविधियों से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
पहला कदम बढ़ाने की हिम्मत जरूरी: अनुपम
अनुपम कहती हैं कि एक समय ऐसा था जब 1500 रुपये की नौकरी छूटने के बाद परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। आज मेहनत के दम पर 50 से 55 हजार रुपये महीने का कारोबार कर रही हूं और समूह की दूसरी महिलाओं को भी काम दे पा रही हूं। इससे आत्मविश्वास बढ़ा है। ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर को पहचानकर चूल्हे-चौके से आगे बढ़ना चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अगर पहला कदम बढ़ाया जाए और मेहनत जारी रखी जाए तो आत्मनिर्भरता की राह जरूर खुलती है।
