पौराणिक कथा : धर्म और मर्यादा का मार्ग

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Edited By Anjali Singh
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विवाह के पश्चात भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी द्वारका में सुखपूर्वक निवास कर रहे थे। एक दिन उन्हें ज्ञात हुआ कि परम प्रतापी एवं शीघ्र क्रोधित होने वाले ऋ षि दुर्वासा द्वारका के समीप पधारे हैं। भारतीय परंपरा में संतों और ऋ षियों का आशीर्वाद नवविवाहित दंपति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी स्वयं ऋ षि दुर्वासा के आश्रम पहुंचे और उन्हें आदरपूर्वक अपने महल में भोजन के लिए आमंत्रित किया।

ऋ षि दुर्वासा ने निमंत्रण स्वीकार किया, लेकिन एक कठिन शर्त रखी। उन्होंने कहा कि उनके रथ को कोई घोड़ा, हाथी या बैल नहीं खींचेगा, बल्कि स्वयं श्री कृष्ण और रुक्मिणी ही उनके रथ को खींचकर द्वारका ले जाएंगे। भगवान श्री कृष्ण अंतर्यामी थे। वे ऋ षि की परीक्षा और स्वभाव को समझते हुए मुस्कुराए और उनकी शर्त स्वीकार कर ली। रथ पर ऋ षि दुर्वासा विराजमान हुए और श्री कृष्ण तथा माता रुक्मिणी रथ खींचते हुए द्वारका की ओर चल पड़े।

ज्येष्ठ मास की प्रचंड गर्मी थी। तपती धरती और कठिन मार्ग के कारण रुक्मिणी जी अत्यंत थक गईं। प्यास के कारण उनका गला सूखने लगा और वे व्याकुल हो उठीं। माता रुक्मिणी की स्थिति देखकर श्री कृष्ण ने अपने चरण के अंगूठे से धरती को स्पर्श किया, वहां से पवित्र जल की धारा प्रकट हुई। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी जी को जल पीने का संकेत किया और उन्होंने अपनी प्यास बुझाई, लेकिन इसी दौरान उनसे एक भूल हो गई। उन्होंने पहले ऋ षि दुर्वासा को जल अर्पित नहीं किया और स्वयं जल पी लिया। ऋ षि ने इसे अपना अनादर समझा और क्रोधित होकर रुक्मिणी जी को श्राप दे दिया।

ऋ षि दुर्वासा के श्राप के कारण रुक्मिणी जी को कुछ समय के लिए श्रीकृष्ण से वियोग सहना पड़ा और द्वारका की भूमि के जल के संबंध में भी श्राप दिया गया। रुक्मिणी जी ने इस परिस्थिति को स्वीकार करते हुए भगवान विष्णु की तपस्या की। श्राप की अवधि पूर्ण होने के बाद उनका पुनः श्री कृष्ण से मिलन हुआ। इसी लोककथा को द्वारका स्थित रुक्मिणी देवी मंदिर की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। द्वारकाधीश मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित रुक्मिणी देवी का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह कथा हमें बताती है कि धर्म और मर्यादा के मार्ग पर छोटी-सी भूल भी महत्वपूर्ण संदेश दे सकती है और सच्ची भक्ति, धैर्य तथा तपस्या अंततः व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाती है।