Janmashtami 2026 : जन्माष्टमी पर मथुरा ही नहीं, इन मंदिरों में भी उमड़ेगा आस्था का सैलाब; विशेष पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन का भी होगा आयोजन
जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन के अलावा जयपुर, नाथद्वारा, कुरुक्षेत्र और दिल्ली के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भी विशेष आयोजन होंगे। मंदिरों में भगवान कृष्ण का श्रृंगार, अभिषेक, आरती, भजन-कीर्तन और आधी रात जन्मोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं।
डिजिटल डेस्क, अमृत विचार। जन्माष्टमी का नाम आते ही मथुरा और वृंदावन की तस्वीर आंखों के सामने उभरती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम देश के कई अन्य शहरों में भी देखने को मिलती है। उत्तर भारत के कई ऐतिहासिक मंदिरों में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, श्रृंगार, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में जयपुर, नाथद्वारा, कुरुक्षेत्र और दिल्ली के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर
राजस्थान की राजधानी जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर जन्माष्टमी के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस ऐतिहासिक मंदिर में जन्माष्टमी पर विशेष दर्शन और आरती का आयोजन किया जाता है। सुबह विशेष मंगला झांकी होती है। इस दौरान भगवान गोविंद देवजी का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं। मंगला और ग्वाल आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जन्माष्टमी पर जयपुर के अन्य कृष्ण मंदिर भी रंग-बिरंगी सजावट, झांकियों और धार्मिक आयोजनों से गुलजार रहते हैं। बच्चे राधा-कृष्ण का रूप धारण करते हैं तो बाजारों में भी त्योहार की रौनक देखने को मिलती है।
नाथद्वारा में बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार
राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां भगवान श्रीनाथजी के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। जन्माष्टमी पर मंदिर में व्रत, बाल गोपाल का श्रृंगार, अभिषेक, भोग और आधी रात जन्मोत्सव की विशेष परंपरा है। मंदिर की परंपरा के अनुसार, आधी रात भगवान कृष्ण के जन्म के समय उन्हें स्नान कराया जाता है और विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद पंजीरी, पंचामृत और फलों का भोग लगाया जाता है। आरती और बधाई गीतों के साथ भगवान के जन्म की खुशी मनाई जाती है।
कुरुक्षेत्र में कृष्ण भक्ति के साथ गूंजेगा गीता का संदेश
हरियाणा का कुरुक्षेत्र भगवान कृष्ण और भगवद्गीता से जुड़े होने के कारण जन्माष्टमी पर विशेष महत्व रखता है। यहां स्थित बिरला मंदिर में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन किया जाता है। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर में भगवान कृष्ण की प्रतिमा और सुंदर परिसर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
कुरुक्षेत्र का इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी के विशेष आयोजनों के लिए जाना जाता है। यहां भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर अभिषेक, भोग, विशेष सजावट और कीर्तन महोत्सव का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर सामूहिक भक्ति में शामिल होते हैं। प्रसाद सेवा भी आयोजन का प्रमुख हिस्सा रहती है।
दिल्ली के मंदिरों में भी जन्मोत्सव की धूम
राजधानी दिल्ली में भी जन्माष्टमी को लेकर प्रमुख मंदिरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान भजन-कीर्तन, पूजा, अभिषेक और भगवान के विशेष दर्शन का आयोजन होता है। इसके अलावा दिल्ली के बिरला मंदिर और विभिन्न राधा-कृष्ण मंदिरों में भी विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों के आसपास राधा-कृष्ण की झांकियां, भक्ति संगीत और धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं। जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन के साथ जयपुर, नाथद्वारा, कुरुक्षेत्र और दिल्ली के मंदिर भी कृष्ण भक्ति के रंग में रंग जाते हैं। इन धार्मिक स्थलों पर पूजा, श्रृंगार और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं।
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