Etawah News : आंखों में रोशनी नहीं, फिर भी हजारों बच्चों के भविष्य में भर रहे उजाला; इंजीनियर से शिक्षक बने प्रकाश सोनी की कहानी
छात्रा बोली- प्रकाश सर जैसा कोई नहीं पढ़ाता
इटावा के लखना निवासी नेत्रहीन शिक्षक प्रकाश सोनी ने 1992 में आंखों की रोशनी गंवाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके प्रकाश ने शिक्षण को अपना मिशन बनाया और आज उनके पढ़ाए कई छात्र एसडीएम, डिप्टी एसपी व इंजीनियर जैसे पदों पर हैं।
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ऐतिहासिक लखना कस्बे के नेत्रहीन शिक्षक प्रकाश सोनी आँखों में रोशनी न होने के बावजूद शिक्षा का ऐसा उजाला फैलाने में जुटे हुए है जिसकी चमक देश विदेश में फैल रही है। उल्लेखनीय है कि 1992 में अचानक उच्च रक्तचाप से अपनी आंखों की रोशनी गंवा देने के बाद से इंजीनियर प्रकाश सोनी शिक्षक बनकर छात्रों के भविष्य को गढ़ने का काम कर रहे हैं।
एसडीएम से डिप्टी एसपी तक बने उनके शिष्य
सबसे खास बात तो यह है कि अपने नाम के अनुरूप प्रकाश सोनी शिक्षण कार्य के माध्यम से ऐसा प्रकाश बिखेर रहे हैं कि उनके कई शिष्य उच्च पद पर आसीन हैं। एसडीएम, डिप्टी एसपी, इंजीनियर ओर न जाने कौन-कौन से पदों पर शिक्षक सोनी के पढ़ाये हुए छात्र आज उनका नाम रोशन करने में लगे है। प्रकाश सोनी लखना देहात में रॉयल हैप्पी किड्स सीनियर सेकेंडरी नाम से स्कूल संचालित करते हैं। वह ब्लैक बोर्ड पर ऐसे लिखते हैं कि जैसे उनकी आंखों की रोशनी हो लेकिन वास्तविकता में आंखों की रोशनी 32 साल पहले एक हादसे में गंवा चुके हैं।
उनकी खूबसूरत लिखावट न केवल स्कूली छात्र-छात्राओं को बेहद पसंद है बल्कि पढ़ने का अंदाज भी छात्र-छात्राओं को बेहद लाजवाब लगता है। लंदन के ख्यातिलब्ध लेखक जान मिल्टन की उपान्यास इन हिज ब्लाइंडनेस की कहानी को अपनी पंसदीदा रचना बताने वाले प्रकाश सोनी की खुद की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है। प्रकाश आज छात्रों के प्रिय शिक्षक बने हुए हैं।
पत्नी हैं स्कूल की प्रधानाचार्य
प्रकाश सोनी की पत्नी विजयलक्ष्मी रॉयल हैप्पी किड्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य हैं । उनका कहना है कि पति इंजीनियर रहे हैं। उन्होंने कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है लेकिन 1992 में हुए एक हादसे ने उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद से कुछ कर गुजरने की ललक ने उनको शिक्षण कार्य की ओर मोड़ दिया। इसके बाद से प्रकाश सोनी लगातार शिक्षण कार्य में बखूबी जुटे हुए हैं। जब पति बीस साल के थे, उस वक्त उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे जाने लगी। 23 साल आते-आते आंखों की रोशनी रेटिना के अपनी जगह से खिसक जाने के कारण पूरी तरह चली गई। चेन्नई के शंकरनेत्रालय अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन रोशनी वापस नहीं आई और 2 मई 1992 को उनके जीवन में हमेशा-हमेशा के लिए अंधेरा छा गया।
छात्रा बोली- प्रकाश सर जैसा कोई नहीं पढ़ाता
स्कूल के शिक्षक स्वदेश कुमार का कहना है कि प्रकाश सोनी शिक्षक नेत्रहीन होने के बाबजूद भी ऐसी अलख जगाये हुए है जिससे उनका हर कोई मुरीद बना हुआ है। माता पिता अपने बेटे बेटियों को उनके स्कूल में पढ़ाना अपना सौभाग्य मनाते है। स्कूली छात्रा पल्लवी कहना है कि प्रकाश सर जैसा कोई दूसरा ऐसा नहीं पढ़ा सकता है प्रकाश जी ऐसा पढ़ाते है जो जहन में एक दफा में ही समा जाता है।
