झीरम घाटी हमले में 13 साल बाद आया फैसला, NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को ठहराया दोषी

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Edited By Muskan Dixit
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2013 के नक्सल हमले में 32 लोगों की निर्मम हत्या से जुड़ा मामला, जगदलपुर की NIA स्पेशल कोर्ट ने सुनाया फैसला

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। शनिवार को जगदलपुर की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने मुकदमे का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि, दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी, इस पर फैसला आना अभी बाकी है।

मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पहले 31 अगस्त को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 5 सितंबर कर दिया गया था।

2013 में परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला

बस्तर के दरभा क्षेत्र स्थित झीरम घाटी में 25 मई 2013 को नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाया था। यह यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। इसी दौरान नक्सलियों ने काफिले को घेरकर विस्फोट और अंधाधुंध गोलीबारी की।

हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई लोगों की जान चली गई थी।

न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इस घटना में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।

2014 में NIA ने दाखिल किया था आरोपपत्र

घटना की प्रारंभिक जांच के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी। जांच एजेंसी ने 25 सितंबर 2014 को विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।

NIA ने हमले में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के विभिन्न कैडरों और सैन्य इकाइयों की भूमिका का आरोप लगाया था।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। इस दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

इन 10 आरोपियों पर चला मुकदमा

अदालत में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमि, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ देंगा और महादेव नाग के खिलाफ मुकदमा चला।

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने पैरवी की।

कई गंभीर धाराओं में चला अभियोजन

मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 149, 341, 121, 121-ए, 122, 307, 302, 427, 396, 397 और 120-बी के तहत अभियोजन चलाया गया।

इसके अलावा आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराएं भी लगाई गई थीं।

अब सजा पर टिकी नजर

सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अब अदालत की ओर से सुनाई जाने वाली सजा पर नजर है। विस्तृत आदेश सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने किन धाराओं में आरोपियों को दोषी माना और किन साक्ष्यों को फैसले का आधार बनाया।

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