Prayagraj News : पेट से निकलीं छह सुइयां, हेयर पिन और कांच के टुकड़े, इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी महिला
सात महीने से मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रही थी महिला
प्रयागराज में डॉक्टरों ने एक महिला के पेट से छह सुइयां, नुकीले हेयर पिन और कांच की चूड़ियों के टुकड़े निकालकर सफल सर्जरी की। चिकित्सकों के अनुसार दो सुइयां आंत को छेदते हुए दाहिने गुर्दे तक पहुंच गई थीं। महिला पिछले सात महीने से मानसिक तनाव और अवसाद से परेशान थी और 'पायका' ईटिंग डिसऑर्डर के कारण अखाद्य वस्तुएं निगल रही थी। करीब तीन घंटे की सर्जरी के बाद सुइयां निकालकर क्षतिग्रस्त आंतों की मरम्मत की गई।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने सर्जरी कर महिला के पेट से छह सुइयां, नुकीले हेयर पिन और कांच की चूड़ियों के टुकड़े निकाले हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ सुइयां आंत में छेद करते हुए दाहिने गुर्दे तक पहुंच गई थीं। करीब तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद सभी सुइयों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।
क्षतिग्रस्त आंतों की मरम्मत के बाद महिला की हालत में सुधार है और उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। फतेहपुर जिले के खागा की रहने वाली विजमा कुमारी पिछले करीब सात महीने से मानसिक तनाव और अवसाद से परेशान थीं। डॉक्टरों के मुताबिक इसी दौरान उन्हें 'पायका' नामक एक दुर्लभ ईटिंग डिसऑर्डर हो गया, जिसके कारण वह सुई, पिन, कांच और अन्य अखाद्य वस्तुएं निगलने लगीं। इसके चलते उनकी आंतों में कई जगह छेद हो गए और पेट में गंभीर संक्रमण फैलने लगा।
डॉक्टरों ने बताया कि दो सुइयां आंत को चीरते हुए दाहिने गुर्दे तक पहुंच गई थीं। महिला की हालत गंभीर होने पर परिजन उसे उपचार के लिए प्रयागराज लेकर आए। महिला के जेठ गुमान सिंह ने बताया कि विजमा करीब सात महीने से मानसिक रूप से परेशान थीं।
कई जगह उपचार कराने के बावजूद समस्या में सुधार नहीं हुआ। एक दिन काम से लौटने पर उन्होंने विजमा को रोते हुए देखा और कारण पूछा। तब उन्होंने सुई निगलने की बात बताई। इसके बाद परिजन उन्हें स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए, जहां एक्स-रे के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद वह उन्हें प्रयागराज लेकर आए।
डॉक्टर राजीव सिंह ने बताया कि स्थानीय स्तर पर एक्स-रे और बाद में सीटी स्कैन के जरिए पेट में फंसी सुइयों की स्थिति का पता लगाया गया। आंतों में सुइयों को तलाशना और उन्हें सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण था। ऑपरेशन थिएटर में आधुनिक 'सी-आर्म' मशीन की मदद से डॉक्टरों की टीम ने करीब तीन घंटे तक सर्जरी कर सभी सुइयां बाहर निकालीं। क्षतिग्रस्त आंतों की भी मरम्मत की गई।
डॉक्टर के अनुसार, 'पायका' एक ऐसा ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति मिट्टी, चॉक, कागज, सुई, पिन, कांच या बाल जैसी ऐसी चीजें खाने लगता है, जो भोजन नहीं हैं। मानसिक तनाव, अवसाद, पारिवारिक कलह और ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) इसके संभावित कारण हो सकते हैं। इसके अलावा शरीर में आयरन, जिंक या अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इस व्यवहार से जुड़ी हो सकती है।
डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य में अत्यधिक मानसिक तनाव या खान-पान के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में समय रहते मनोरोग विशेषज्ञ और संबंधित चिकित्सक से संपर्क कर जांच तथा काउंसलिंग करानी चाहिए।
