मुरादाबाद: 357 स्कूलों में नहीं हुआ पुस्तकालयों का निर्माण
मुरादाबाद, अमृत विचार। पुस्तकालयों में पुस्तकों से निशुल्क ज्ञान लेने का सपना परिषदीय स्कूलों कें छात्र-छात्राओं का पूरा नहीं हो सका है। दो साल पहले हुए आदेशों पर आज तक अमल नहीं किया गया है। जिसके चलते जिले के 357 परिषदीय स्कूल पुस्तकालयों की बांट जोह रहे हैं। यहां पुस्तकालय खोलने की बात तो कही …
मुरादाबाद, अमृत विचार। पुस्तकालयों में पुस्तकों से निशुल्क ज्ञान लेने का सपना परिषदीय स्कूलों कें छात्र-छात्राओं का पूरा नहीं हो सका है। दो साल पहले हुए आदेशों पर आज तक अमल नहीं किया गया है। जिसके चलते जिले के 357 परिषदीय स्कूल पुस्तकालयों की बांट जोह रहे हैं। यहां पुस्तकालय खोलने की बात तो कही जा रही है, लेकिन वर्तमान में नामों निशां तक नही है। जहां पुस्तकालय हैं भी तो वहां इसके नाम पर मजाक किया गया है। महज एक छोटे से कमरें में बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था की गई है।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को शिक्षा प्रदान कर आयाम स्थापित करने के दावे धरातल पर दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। निजी स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय स्कूल में भी पुस्तकालय बनाने के लिए शासन ने दो साल पहले आदेश किए थे। प्राथमिक विद्यालयों में पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए दस हजार रुपए की धनराशि भी विभाग को उपलब्ध कराई गई। जनपद में 1414 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 882 प्राथमिक, 232 उच्च प्राथमिक और 300 कंपोजिट विद्यालय हैं।
277 प्राथमिक और 80 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन की और से बजट जारी हो जाने के बाद भी पुस्तकालयों का अता-पता नहीं हैं। इस स्थिति को देखकर लगता है कि विभागीय अधिकारियों की और से भी कभी प्रधानाध्यपकों और शिक्षकों से इस बारे में जवाब तलब नहीं किया गया। पुस्तकालय की योजना इस उद्देश्य से शुरू हुई कि सरकारी स्कूलों के बच्चों का ज्ञान बढ़ सके, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और जिम्मेदारों के सुस्त रवैय की वजह से हजारों नौनिहाल देश के प्रसिद्ध लेखकों और उनकी कविताओं से अनजान हैं।
8.23 लाख जारी हो चुका है बजट
बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का आलम चरम पर है। दो साल पहले शासन से पुस्तकालय खोलने के लिए 8.23 लाख रुपये का मोटा बजट जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद एक भी परिषदीय विद्यालय में पुस्तकालय नहीं खोला गया। ऐसे में सवाल उठता है कि अधिकारियों ने इतने बजट को आखिर किस काम के लिए प्रयोग किया या नहीं। इसको लेकर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी भी कुछ कहने से बच रहे हैं। जिससे जाहिर होता है कि पुस्तकालय के बजट को ठिकाने लगा दिया गया।
दो वर्ष पूर्व बजट मिलते ही बीआरसी पर धनराशि मुहैया करा दी गई थी। ताकि पुस्तकालय समय से खोले जा सके। कुछ स्कूलों में जगह कम होने की वजह से एक कमरें में ही पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है। अगर कहीं स्कूलों में पुस्तकालयों के न होने की सूचना है तो, इसकी जानकारी कर जवाब मांगा जाएगा।-तेजपाल सिंह, जिला समन्वयक, प्रशिक्षण
