शर्मनाक घटना

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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बदायूं के एक धर्मस्थल में महिला के साथ जिस तरह से सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना को अंजाम दिया गया उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम होगी। घटना को अंजाम देने वालों ने न सिर्फ संवेदनहीनता की पराकाष्ठा की बल्कि ऐसा अमानवीय कृत्य किया है जिसकी जितनी सजा हो, कम होगी। घटना …

बदायूं के एक धर्मस्थल में महिला के साथ जिस तरह से सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना को अंजाम दिया गया उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम होगी। घटना को अंजाम देने वालों ने न सिर्फ संवेदनहीनता की पराकाष्ठा की बल्कि ऐसा अमानवीय कृत्य किया है जिसकी जितनी सजा हो, कम होगी। घटना को अंजाम देने वाले हैवानियत की हद को पार कर गए। उन्होंने सामूहिक दुष्कर्म का विरोध करने पर न सिर्फ निर्दोष महिला के पैर और पसली तोड़ दी बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड भी डाल दी।

इस घटना ने दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया कांड को ताजा कर दिया है जिसे ऐसी ही दरिंदगी के साथ अंजाम दिया गया। निर्भया कांड में अदालत ने दोषियों को जो सजा दी वह बदायूं कांड के दोषियों को भी मिलनी चाहिए साथ ही समाज में ऐसे दरिंदों का प्रतिकार भी होना चाहिए।

निर्भया कांड में सजा ऐसे जघन्य नारी अपराधों के लिए नजीर बनी। इस घटना ने समूचे देश को हिलाकर रख दिया था। बदायूं कांड ने भी इसी तर्ज पर न सिर्फ समूचे जनमानस को झकझोर दिया है बल्कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी हरकत में आ गई है। प्रदेश सरकार ने तत्काल एक्शन लिया। आरोपियों की गिरफ्तारी को इनाम घोषित किया, साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी है।

इस घटना में दो आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए और थानेदार को निलंबित कर दिया गया, लेकिन महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी निर्दयता से हत्या की घटनाओं की पुनरावृत्ति बहुत सारे सवाल खड़े करती है। सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद भी समाज में छुपे मानव की शक्ल में भेड़िये बाज नहीं आ रहे तो चिंता स्वाभाविक हो जाती है। ऐसी अमानवीय घटनाओं को अंजाम देने वालों को दरिंदे और राक्षस जैसे कितने की शब्दों से भर्त्सना की जाए, कम ही होगी लेकिन सवाल यह है कि ऐसी घटनाओं को रोका जाना कैसे संभव हो? ताकि कोई और निरीह, निर्दोष महिला ऐसे हैवानों की शिकार न होने पाए।

समाज के सभ्य लोगों को कानून से पहले ऐसे लोगों पर नजर रखनी होगी। ऐसे लोगों पर कानूनी शिकंजा तो कसा ही जाना चाहिए, इनका सामाजिक बहिष्कार भी होना चाहिए। विद्वानों की राय गलत नहीं है कि हमारे संस्कारों में महिलाओं के प्रति सम्मान और नैतिकता का भाव कूट-कूटकर भरा जाना चाहिए। आज सोशल मीडिया और टेलीविजन पर परोसी जाने वाले असभ्य सामग्री पर भी रोकथाम लगाने की जरूरत है।