बरेली: तलाक के बाद चेहरा देखना तक हराम तो परामर्श केंद्र में कैसे हो सुलह
आसिफ अंसारी, बरेली। देवरनियां थाना क्षेत्र के गुलामनगर की निवासी शमा का निकाह 24 अगस्त को बहेड़ी के लोधीपुर निवासी मोहम्मद हनीफ पुत्र मोहम्मद उमर के साथ था। शादी के बाद महिला को पता लगा कि उमर के पहले ही शादी हो चुकी है और पहले से दो बेटियां भी हैं। इसके बाद सास, ननद, …
आसिफ अंसारी, बरेली। देवरनियां थाना क्षेत्र के गुलामनगर की निवासी शमा का निकाह 24 अगस्त को बहेड़ी के लोधीपुर निवासी मोहम्मद हनीफ पुत्र मोहम्मद उमर के साथ था। शादी के बाद महिला को पता लगा कि उमर के पहले ही शादी हो चुकी है और पहले से दो बेटियां भी हैं। इसके बाद सास, ननद, देवर और पति लाकडाउन में दहेज न मिलने की बात कहकर मायके से कार लाने की मांग करने लगे। मना करने पर शमा का गर्भपात करवा दिया। इसके बाद उसे 2 नवंबर को तीन तलाक देकर निकाल दिया। इस मामले की पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
इसी तरह सीबीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला का निकाह 2016 में इज्जतनगर थाना क्षेत्र के परतापुर चौधरी निवासी युवक से हुआ था। 26 अक्टूबर को परिवार के कहने पर पति ने महिला को सबके सामने तीन तलाक दे दिया। इसके बाद देवर से हलाला करने के बाद निकाह करने का दबाव बनाने लगे। महिला जब इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पहुंची तो पुलिस ने उसे भगा दिया।
वहीं, बदायूं जिले के बिनावर की रहने वाली एक महिला को पति ने कम दहेज लाने की बात कहकर उसे तीन तलाक दे दिया। बिनवार थाने में तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की, जिसके बाद पीड़ित महिला ने एडीजी को प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की है।
यह दर्द तमाम तलाक पीड़िताओं का है, जिनकी रिपोर्ट पुलिस दर्ज नहीं कर रही है। तीन तलाक पीड़िताएं आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, मगर उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है। ऐसा तब है जबकि तीन तलाक के मामले लगातार सामने आने के बाद मोदी सरकार ने संसद में बिल पेश करने के बाद कानून बनाया था। इसके बाद कानूनी कार्रवाई होने के डर की वजह से तलाक के मामलों में कमी आई थी। मगर अब पुलिस की लापरवाही और ढिलमुल रवैये की वजह से फिर से तलाक के मामले बढ़ने लगे हैं।
अक्सर देखा जाता है कि तलाक का मामले में तहरीर मिलने के बाद संबंधित थाने की पुलिस मुकदमा लिखने के बाद विवेचना की कार्रवाई से बचने के लिए परिवार परामर्श केन्द्र में भेजकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। हालांकि, इस्लाम के अनुसार पति-पत्नी एक दूसरे का चेहरा भी नहीं देख सकते हैं। इसी वजह से महिलाएं परिवार परामर्श केन्द्र में जाने से कतराती हैं। इससे उनके दर्द का निस्तारण का नहीं हो पा रहा है।
कार्रवाई का आश्वासन देकर पुलिस ने लगा दी एफआर
किला थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले की रहने वाली महिला ने बताया कि उसकी शादी नवंबर 2017 में एटा के रहने वाले कामरान के साथ हुई थी। ससुराल वालों के खिलाफ दहेज एक्ट की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिसके लिए कोर्ट ने पुलिस को सुलह करने के आदेश दिए थे। सुलह न होने पर कामरान ने अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया। इसके बाद महिला ने बरेली के महिला थाने में तलाक का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट में दाखिल कर दी, जिसके बाद पीड़ित महिला ने एसएसपी से महिला दरोगा की शिकायत की थी।
“तलाक के मामलों में शिकायत मिलने के बाद ही तुरंत उस पर रिपोर्ट दर्ज की जाती है। अगर तहरीर के बाद भी थानेदार रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।” -रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
