पुलिस का रवैया
बदायूं जिले के उद्यैती थाना क्षेत्र में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस का जो रवैया सामने आया है वह स्मार्ट पुलििसंग की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा और आला पुलिस अफसरों के दावों के एकदम विपरीत है। रविवार शाम को धर्मस्थल में पूजा-अर्चना करने गई …
बदायूं जिले के उद्यैती थाना क्षेत्र में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस का जो रवैया सामने आया है वह स्मार्ट पुलििसंग की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा और आला पुलिस अफसरों के दावों के एकदम विपरीत है। रविवार शाम को धर्मस्थल में पूजा-अर्चना करने गई महिला के साथ हैवानियत करने के आरोपी रविवार रात करीब 12 बजे उसका शव यह कहकर घर के दरवाजे पर छोड़ गए कि उसके साथ हादसा हो गया।
इसके तत्काल बाद ही मृतका के बेटे और कुछ ग्रामीणों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए उद्यैती थाना पुलिस को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया था लेकिन ग्रामीणों के घंटों इंतजार के बाद भी पुलिस नहीं आई। नतीजतन, आरोपियों को फरार होने का न सिर्फ मौका मिल गया बल्कि घटना की सच्चाई सामने आने में भी वक्त लग गया। अगले दिन सोमवार को सुबह 10 बजे मृतका के रिश्तेदार उद्यैती थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी मौजूद नहीं थे और अन्य पुलिस कर्मियों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया।
इसके दो घंटे बाद रिश्तेदार फिर थाने गए तो उनसे पुलिसवालों ने कह दिया कि थाना प्रभारी हों तो आना। दोपहर बाद करीब 3 बजे जब रिश्तेदारों को कुछ न सूझा तो उन्होंने डायल 112 पर फोन किया। गांव पहुंची रेस्पांस व्हीकल ने थाना प्रभारी को सूचित किया तो तत्कालीन थाना प्रभारी गांव पहुंचे लेकिन वह कुएं में गिरने से हादसे की बात कहकर कार्रवाई से बचने की कोशिश करते रहे।
ग्रामीणों ने जब जिद की तो पोस्टमार्टम को शव भेजने के लिए तैयार हुए। परिजनों ने शाम को सात बजे दुष्कर्म और हत्या की तहरीर दी लेकिन थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उसके अगले दिन मंगलवार को सुबह 10 बजे जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई तो रिपोर्ट दर्ज की जा सकी।
जाहिर है कि पुलिस ने इतने गंभीर मामले में कार्रवाई करने में इतना वक्त लगा दिया। इससे साबित हो जाता है कि आम जनता को न्याय कहां है? यूपी पुलिस की टालमटोल और सुस्त कार्यशैली परेशानहाल और भुक्तभोगी जनता के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। बदायूं के इस कांड में ही नहीं, न जाने कितने ही मामलों में यूपी पुलिस का यह चेहरा सामने आया है।
कई छोटे-मोटे मामलों में लोग इसलिए पुलिस थाने नहीं जाते कि पुलिस से न्याय मिल पाने की कोई उम्मीद नहीं होती। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें लोग लुटते-पिटते हैं और पहले तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं करती। रिपोर्ट दर्ज कर भी ले जो कार्रवाई नहीं करती। ऐसे में स्मार्ट पुलिसिंग के दावे अभी तो बेमानी ही लगते हैं।
