कृषि कानून: किसानों और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत जारी

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए प्रदर्शनकारी किसान संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच आठवें दौर की वार्ता शुक्रवार को शुरू हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री तथा पंजाब से सांसद सोम प्रकाश करीब 40 किसान …

नई दिल्ली। कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए प्रदर्शनकारी किसान संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच आठवें दौर की वार्ता शुक्रवार को शुरू हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री तथा पंजाब से सांसद सोम प्रकाश करीब 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विज्ञान भवन में वार्ता कर रहे हैं।

किसान यूनियनों के साथ शुक्रवार को आठवें दौर की वार्ता से पहले केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बैठक करीब एक घंटा चली। हालांकि इस दौरान किन मुद्दों पर बातचीत हुई, यह पता नहीं चल पाया है।

इससे पहले, चार जनवरी को हुई वार्ता बेनतीजा रही थी क्योंकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर डटे रहे, वहीं सरकार ”समस्या” वाले प्रावधानों या गतिरोध दूर करने के लिए अन्य विकल्पों पर ही बात करना चाहती है। किसान संगठनों और केंद्र के बीच 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में दो मांगों पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और बिजली पर सब्सिडी जारी रखने को लेकर सहमति बनी थी। इ

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने उम्मीद जतायी कि शुक्रवार की बैठक में कोई समाधान निकलेगा। चौधरी ने बातचीत में कहा, ”मुझे उम्मीद है कि शुक्रवार को होने वाली बैठक में किसी समाधान तक पहुंचा जा सकेगा। प्रदर्शन कर रही किसान यूनियनों ने पहली बैठक में उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की होती तो अभी तक तो हम गतिरोध को समाप्त कर चुके होते।” उन्होंने कहा कि पहली बैठक में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं की गई थी।

बैठक के पहले ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेसीसी) की सदस्य कविता कुरूंगती ने कहा, ”अगर आज की बैठक में समाधान नहीं निकला तो हम 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने की अपनी योजना पर आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने कहा, ”हमारी मुख्य मांग कानूनों को निरस्त करना है। हम किसी भी संशोधनों को स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार इसे अहम का मुद्दा बना रही है और कानून वापस नहीं ले रही है। लेकिन, यह सभी किसानों के लिए जीवन और मरण का प्रश्न है। शुरुआत से ही हमारे रूख में कोई बदलाव नहीं आया है।”

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