बरेली: झुग्गियों को किया ध्वस्त, पक्के निर्माणों पर नहीं चली रेलवे की जेसीबी
अमृत विचार, बरेली। शाहदाना में रेलवे की जमीन से शुक्रवार को अतिक्रमण हटाया गया। इस दौरान गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे अवैध निर्माण तो ध्वस्त कर दिए गए लेकिन पक्के निर्माणों पर जेसीबी नहीं चलाई गई। हालांकि, इनका चिह्नीकरण कर लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने पक्के अवैध निर्माण किए हैं उनका …
अमृत विचार, बरेली। शाहदाना में रेलवे की जमीन से शुक्रवार को अतिक्रमण हटाया गया। इस दौरान गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे अवैध निर्माण तो ध्वस्त कर दिए गए लेकिन पक्के निर्माणों पर जेसीबी नहीं चलाई गई। हालांकि, इनका चिह्नीकरण कर लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने पक्के अवैध निर्माण किए हैं उनका चिह्नीकरण कर लिया गया है। उन्हें अतिक्रमण हटाने के लिए चार दिन का समय दिया गया है। अगर चार दिन के भीतर अतिक्रमणकारियों ने खुद ही अतिक्रमण नहीं हटाया तो रेलवे उन्हें ध्वस्त कर देगा।
वर्षों से अतिक्रमणकारियों के कब्जे में पड़ी रेलवे की जमीन को खाली कराने के लिए 5 जनवरी से रेलवे ने अभियान चला रखा है। इस जमीन पर कुल 195 लोगों ने कब्जा कर लिया था। अभियान के दौरान रेलवे ने गरीब लोगों के कुल 47 कच्चे घरों को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने समय मांगा या विरोध करने की कोशिश की तो आरपीएफ ने उन्हें चुप करा दिया। जब नौबत पक्के अवैध निर्माण गिराने की आई तो अभियान रोक दिया गया।
कहा जाने लगा कि पहले चिह्नीकरण किया जाएगा उसके बाद आगे का अभियान जारी होगा जबकि प्रशासन से केवल आठ जनवरी तक ही अभियान चलाने की अनुमति मिली थी। रेलवे की टीम ने अभियान को दो दिन पहले ही रोक दिया। दो दिनों तक सिर्फ चिह्नीकरण किया गया जबकि इससे पहले भी कई बार नोटिस और चिह्नीकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसके बाद भी रेलवे ने अभियान पक्षपात करते हुए रोक दिया।
भेदभाव के सवाल पर अफसर साध गए चुप्पी
इज्जतनगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह का कहना है कि चिह्नीकरण के साथ लोगों को चार दिनों का समय दिया गया है। यदि इसके बाद भी वे नहीं तोड़ते हैं तो रेलवे मकान ध्वस्त कर देगा। उनका कहना है कि जेसीबी से मकान तोड़ने में काफी नुकसान होता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गरीबों और झुग्गी वालों ने रेलवे की टीम से कुछ दिनों का समय मांगा तो उन्हें क्यों नहीं दिया गया? क्या उनके मकानों के ऊपर जेसीबी चलाने से नुकसान नहीं हुआ था। इस पर अधिकारियों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि रेलवे ने अधिकारियों ने दबाव में आकर इस अभियान को रोका है।
अभी और भी चलेगी चिह्नीकरण की प्रक्रिया
राजेंद्र सिंह का कहना है कि वह फिर से प्रशासन को एक पत्र लिखेंगे। चार दिन का समय पूरा होने के बाद भी यदि अतिक्रमण ध्वस्त नहीं किया गया तो उन पर जेसीबी चला दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने बताया कि अभी चार दिन तक सिर्फ चिह्नीकरण का कार्य ही चलेगा।
