बरेली: कुपोषण मिटाने के लिए मुफ्त गाय देने की योजना धड़ाम

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अमृत विचार, बरेली। सड़कों और गली-मोहल्लों में गाय आवारा घूम रहीं हैं। आवारा गाय पेट भरने के लिए पॉलीथिन तक खा जाती हैं। लोगों की शिकायत पर नगर निगम इन्हें पकड़कर गौशाला पहुंचाता है लेकिन यहां उन्हें भरपेट चारा नहीं मिल पाता। ऐसी तमाम शिकायतें शासन तक पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौशाला में …

अमृत विचार, बरेली। सड़कों और गली-मोहल्लों में गाय आवारा घूम रहीं हैं। आवारा गाय पेट भरने के लिए पॉलीथिन तक खा जाती हैं। लोगों की शिकायत पर नगर निगम इन्हें पकड़कर गौशाला पहुंचाता है लेकिन यहां उन्हें भरपेट चारा नहीं मिल पाता। ऐसी तमाम शिकायतें शासन तक पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौशाला में रह रहीं दुधारू गायों को कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के परिजनों को देना का फरमान जारी किया था लेकिन जिले में अधिकांश परिवार निराश्रित गौवंश सहभागिता योजना के तहत लेने का तैयार नहीं है।

जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या है लेकिन अब तक मात्र 11 परिवारों ने ही योजना के तहत गाय लेने में दिलचस्पी दिखाई है। ऐसी स्थिति में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जहां दम तोड़ रही है वहीं, कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने की मुहिम को भी झटका लगा है।

योजना के तहत बाल विकास विभाग कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के घर जाकर परिवारों को गाय गोद लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। गाय पालने के एवज में प्रतिमाह उसके चारे के बदले नौ सौ रुपये दिये जाने का प्रावधान है। जिले में पांच साल की उम्र तक 3570 अतिकुपोषित और 36 हजार के करीब कुपोषित बच्चे हैं।

हालत यह है कि करीब दो महीने पहले शुरू की गई योजना में अब तक 40 हजार कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के परिवारों में मात्र 11 ने ही गाय ली है। इससे योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं। अधिकारी ऐसे परिवार के लोगों को गाय पालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं लेकिन कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य
पांच वर्ष से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण कुपोषण है। कुपोषण से प्रभावित जीवित बच्चों की भी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे वे अक्सर बीमार रहते हैं और उनका विकास नहीं हो पाता। इसे देखते हुए योगी सरकार ने बच्चों का कुपोषण दूर करने और उन्हें सेहतमंद बनाने के उद्देश्य से गाय देने की योजना शुरू की है।

शहर से किसी ने नहीं किया आवेदन
कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावाकों की तरफ से करीब पचास आवेदन आ चुके हैं। इनमें शहरी क्षेत्र से इक्क-दुक्का ही हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि शहरी क्षेत्र के नहीं सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के लोग ही गाय लेने में रुचि दिखा रहे हैं। वहीं, शासन की प्राथमिकता वाली इस योजना में मात्र दस फीसदी आवेदन आने से अफसरों की टेंशन बढ़ गई है। यह आलम तब है जब योजना में इच्छुक परिवार को उनकी पसंद के तहत नजदीक की गौशाला से गाय दिलाने का प्रावधान किया गया है।

अभी बच्चों को दिया जाता है पोषाहार
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को पोषाहार दिया जाता है। छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को माह की 5, 15 व 25 तारीख को पंजीरी व अन्य खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। तीन से छह साल तक के बच्चों को 50 ग्राम प्रति बच्चा मॉर्निंग स्नैक्स भी देने का प्रावधान है। अति कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में भर्ती कराकर इलाज कराने की व्यवस्था है। अब प्रदेश सरकार ने गौशालाओं से गाय दिलाने की व्यवस्था की है।

कुपोषित बच्चों के परिवार वालों को मुफ्त में गाय लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है लेकिन अधिकांश लोग इसमें रूचि नहीं दिखा रहे। अब तक नाममात्र परिवारों ने ही गाय लेने की इच्छी जताई है। पशुपालन विभाग से इसमें सहयोग लिया जा रहा है। – डा. आरबी सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी

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