मुरादाबाद: बिखरते परिवार को बचाने में नारी उत्थान केंद्र ने की बड़ी पहल

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। वक्त के साथ कमजोर हो रही रिश्तों की डोर को काफी हद तक नारी उत्थान केंद्र सहारा दे रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि रिश्ते की डोर टूटने पर पति-पत्नी को अलगाव का दंश न झेलना पड़े। इस अलगाव के बाद पति-पत्नी के रास्ते तो जुदा हो जाते हैं लेकिन …

मुरादाबाद, अमृत विचार। वक्त के साथ कमजोर हो रही रिश्तों की डोर को काफी हद तक नारी उत्थान केंद्र सहारा दे रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि रिश्ते की डोर टूटने पर पति-पत्नी को अलगाव का दंश न झेलना पड़े। इस अलगाव के बाद पति-पत्नी के रास्ते तो जुदा हो जाते हैं लेकिन उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। लिहाजा टूटते घरों को बचाने के लिए शासन की ओर से शुरू हुई पहल को नारी उत्थान केंद्र काफी बेहतर तरीके से आगे बढ़ा रहा है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि लाकडाउन के बावजूद भी वर्ष 2020 में करीब 2403 मामले आए। केंद्र में कुछ मामले तो ऐसे आते हैं कि वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने वाले तो छोड़िए सालों से एक दूसरे के साथ रहने वाले दंपति एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाकर अलग रहने की जिद करने लगते हैं। कभी कोई पति की नशे की आदत से तंग होता है तो कभी ससुरालियों के अधिक हस्तक्षेप से अलग रहने की बात कहता है। पति-पत्नी की जिद के आगे बच्चों के बेहतर भविष्य का हवाला देकर उनको साथ रहने के लिए राजी किया जाता है।

वर्ष 2008 में शुरू हुआ था नारी उत्थान केंद्र
टूटते घरों को बचाने के लिए वर्ष 2008 में प्रदेश सरकार ने परिवार परामर्श केंद्र खोलने के आदेश दिए थे। हालांकि बाद में इसका नाम नारी उत्थान केंद्र कर दिया गया। इसके पीछे शासन की मंशा थी कि पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों में सीधे रिपोर्ट दर्ज न की जाए, बल्कि उनके बीच की गलतफहमी या कड़वाहट को दूर करके एक साथ रहने के लिए राजी किया जाए। इसके लिए बाकायदा जिलावार एक टीम का गठन किया गया। जिसमें पुलिसकर्मियों के अलावा समाजसेवी, वरिष्ठ व्यक्ति, राजनीति से ताल्लुक रखने वाले, चिकित्सक व मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया गया था। शुरुआत में हर सप्ताह शनिवार को केंद्र में आने वाले मामलों की सुनवाई होती थी। बाद में जिलावार अफसरों ने अपनी सुविधा अनुसार दिन मुकर्रर कर दिया। तब से पूरे प्रदेश में हर जिले में सप्ताह में एक बार टूटते घरों को बचाने की मुहिम चल रही है। हालांकि आज के दौर में इस केंद्र में पहले प्यार फिर शादी और तकरार व नशे के कारण अलग होने के मामले अधिक आ रहे हैं।

वर्ष 2020 में आए 2403 मामले
वर्ष 2020 का आधा वक्त तो लाकडाउन में चला गया। करीब तीन माह तक नारी उत्थान केंद्र पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान इक्का-दुक्का मामले तो आए लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। हालांकि आपको जानकर हैरानी होगी कि लाकडाउन के बाद भी पूरे वर्ष में 2403 मामले नारी उत्थान केंद्र आए। जिसमें से आपसी सुलह-समझौते के जरिए 2024 मामलों का निस्तारण कर दिया गया। जबकि कई बार काउंसलिंग के बाद भी समझौता न होने पर 154 मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए गए। जबकि 225 मामलों में अभी भी सुनवाई चल रही है।

शादी के बीते 25 साल, फिर भी कर रहे शक
काफी समय पहले नारी उत्थान केंद्र में एक ऐसा मामला आया था कि काउंसलर भी असमंजस में आ गए। दरअसल एक दंपति ने केंद्र में एक-दूसरे से अलग रहने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। दोनों को जब काउंसलिंग के लिए बुलाया गया तो वह उम्रदराज निकले। पूछने पर उन्होंने बताया कि विवाह के करीब 25 साल हो गए हैं। परेशानी पूछने पर दोनों ने एक-दूसरे पर शक करने का आरोप लगाया। उनको समझाने का प्रयास किया गया लेकिन वह साथ रहने को तैयार नहीं हुए। फिर समाज व उम्र का हवाला देकर उनको समझाने का प्रयास किया गया। दोनों को तीन बार काउंसलिंग के लिए केंद्र बुलाया गया। इसके बाद वह साथ रहने को राजी हुए।

पति नशा छोड़े या संपत्ति बेटे के नाम करें
हाल में ही एक मामला आया कि महिला अपने पति की नशे की आदत के कारण साथ रहना नहीं चाहती थी। महानगर निवासी अंजू ने प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसकी करीब 11 साल पहले पवन से शादी हुई थी। उसका 11 साल का बेटा है। पति कुछ काम नहीं करता है और किराए की रकम से घर का गुजारा होता है। इसके अलावा पवन शराब के नशे का आदी है। जिस कारण संपत्ति बेच रहा है। महिला ने कहा कि पति या तो नशा छोड़े या फिर संपत्ति बेटे के नाम करें। दोनों को केंद्र बुलाकर समझाया गया, बच्चे के भविष्य का हवाला दिया। जिस पर पति बेटे के नाम संपत्ति करने को राजी हो गया। इसके बाद दोनों को घर भेज दिया गया।

उत्थान केंद्र में जहां टूटते घरों को जोड़ा जाता है, वहीं लोगों की नशे की आदत छूट रही है, क्योंकि नशे के कारण कई घर टूटने की कगार पर पहुंच गए थे। समझाने के बाद कईयों ने नशे का त्याग कर दिया। पूरे साल में करीब 2024 मामलों का निस्तारण किया गया है।- रितु नारंग, काउंसलर, नारी उत्थान केंद्र

 

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