बरेली: ‘वरासत’ ने जगाई विरासत की उम्मीद
अमृत विचार, बरेली। तहसीलों के चक्कर काटकर चप्पलें घिस गई थीं। जेब में लेखपाल व तहसील के अन्य कर्मचारियों को देने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं थी। अधिकारियों के कार्यालयों के दरवाजे खट-खटाकर भी नाउम्मीदी ही हासिल हुई। कई ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के यहां भी गुहार लगाई लेकिन उनकी विरासत दर्ज नहीं हुई। जो …
अमृत विचार, बरेली। तहसीलों के चक्कर काटकर चप्पलें घिस गई थीं। जेब में लेखपाल व तहसील के अन्य कर्मचारियों को देने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं थी। अधिकारियों के कार्यालयों के दरवाजे खट-खटाकर भी नाउम्मीदी ही हासिल हुई। कई ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के यहां भी गुहार लगाई लेकिन उनकी विरासत दर्ज नहीं हुई। जो फाइल तैयार कराकर तहसीलों में जमा की गईं उनके बारे में कर्मचारी तक भूल गए लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो वरासत अभियान शुरू किया उसने लोगों को विरासत का हकदार बना दिया। जिले के 4838 ग्रामीणों की विरासतें अटकी हुई थीं।
इस अभियान से ग्रामीणों की नाउम्मीदी उम्मीद में बदल गई। 30 दिसंबर, 2020 तक विरासत दर्ज कराने के लिए सदर, मीरगंज, बहेड़ी, फरीदपुर, नवाबगंज, आंवला तहसील के 4838 ग्रामीणों ने आवेदन जमा किया। वरासत अभियान के तहत 400 लेखपालों ने 2149 गांवों का भ्रमण करते हुए खुली बैठकें कीं। उसमें ग्रामीणों की पीड़ा बाहर आई और उन्होंने अभियान में अपना नाम लिखाते हुए विरासत बनवाने को कागजात जमा किए।
कलेक्ट्रेट के भू-लेख विभाग के अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि 2978 आवेदनों की जांच पूरी हो गई है। इनके नाम भी लॉगिंग पर दर्ज करा दिए हैं। 1362 ग्रामीणों की विरासत बनाई जा चुकी है। बताया कि अन्य आवेदनों को फीड कराया जा रहा है। 30 जनवरी तक सभी की विरासत बन जाएगी।
15 जनवरी तक लेखपाल प्राप्त आवेदन पत्रों के संबंध में खुद स्थलीय और अभिलेखीय जांच करेंगे। विधिक उत्तराधिकारियों के नाम व विवरण के संबंध में अपनी स्पष्ट जांच आख्या पोर्टल पर अंकित करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद ग्रामीणों को इसका लाभ मिलेगा।
