अब सुप्रीम कदम

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Edited By Amrit Vichar
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नए कृषि कानूनों के अमल पर अंतरिम रोक लगाने का मंगलवार को उठाया गया सुप्रीम कोर्ट का कदम किसान आंदोलन से उपजे हालात से देश को उबारने की दिशा में एक मजबूत पहल कहा जाए तो उिचत ही होगा। पिछले डेढ़-दो महीने से चल रहे किसान आंदोलन का कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। …

नए कृषि कानूनों के अमल पर अंतरिम रोक लगाने का मंगलवार को उठाया गया सुप्रीम कोर्ट का कदम किसान आंदोलन से उपजे हालात से देश को उबारने की दिशा में एक मजबूत पहल कहा जाए तो उिचत ही होगा। पिछले डेढ़-दो महीने से चल रहे किसान आंदोलन का कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है।

आंदोलनकारी किसान नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं तो केंद्र सरकार ऐसा न करने की अपनी हठ पर है। ऐसे में, बरकरार अनिश्चिय की स्थिति खत्म करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने दूरदर्शिता वाला कदम उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के अमल पर अंतरिम रोक लगाकर आंदोलनरत किसानों को इसके लिए आश्वस्त किया है कि यदि ये कानून गलत हैं तो वह उनके तर्कों पर इसका परीक्षण करेगा। इसके लिए शीर्ष अदालत ने कमेटी बनाई है। यह कमेटी बनाकर शीर्ष अदालत ने सरकार को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

देश में ऐसे हालात उत्पन्न हों कि शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका प्रबल होने लगे। सरकार और जनतंत्र में टकराव की नौबत आ जाए तो न्याय पालिका से ही सार्थक रास्ता निकालने की उम्मीद की जाती है। लोकतंत्र का यह मजबूत और शीर्ष स्तंभ ही इसके लिए समर्थ है कि वह संविधान के दायरे में समाधान का उपयुक्त रास्ता निकाले।

यही शीर्ष न्यायालय ने किया है। कोई दो राय नहीं कि किसान आंदोलन के चलते देश में हालात बेकाबू होने के हालात बनने लगे हैं। कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार की ओर से किसानों से अब तक हुई वार्ताएं बेनतीजा रहीं। सबसे अहम बात यह है कि सरकार इस आंदोलन को किसानों का आंदोलन मानने को ही तैयार नहीं है। वह आईबी और अन्य खुफिया रिपोर्टों के हवाले से कहती आ रही है कि किसान आंदोलन के नाम पर खालिस्तानी आंदोलन कर रहे हैं।

सरकार का रुख शुरू से ही कृषि कानूनों को लेकर अड़ियल रहा। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि आपने इस मामले को सही से हैंडल नहीं किया। अब चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप किया है। ऐसे में, उम्मीद की जानी चािहए कि जल्द समाधान का रास्ता निकलेगा।

किसान आंदोलन का खमियाजा आम जनता को भी भुगतना पड़ रहा है, इसलिए जल्द समाधान बेहद जरूरी है। इसको सुप्रीम कोर्ट ने भलीभांति महसूस भी किया है इसीलिए कहा है- नागरिकों के जीवन और संपत्ति को लेकर वह चिंतित हैं और समस्या के समाधान की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में, निस्संदेह शीर्ष अदालत ही सार्थक रास्ता निकालेगी।