बरेली: तालाब सुखाकर चंद लोगों के लिए खर्च कर दिए 1.70 करोड़ रुपये
बरेली, अमृत विचार। अंग्रेजों के बसाए कंपनी गार्डन, अब गांधी उद्यान के तालाब और इसके प्राकृतिक सौंदर्य की खूबसूरती की चर्चा सौ साल से भी पुरानी है। देश को आजादी मिलने के बाद गांधी उद्यान नगर पालिका (अब नगर निगम) की संपत्ति बन गया है, लेकिन नगर निगम ने इसके सौंदर्य को और निखारने के …
बरेली, अमृत विचार। अंग्रेजों के बसाए कंपनी गार्डन, अब गांधी उद्यान के तालाब और इसके प्राकृतिक सौंदर्य की खूबसूरती की चर्चा सौ साल से भी पुरानी है। देश को आजादी मिलने के बाद गांधी उद्यान नगर पालिका (अब नगर निगम) की संपत्ति बन गया है, लेकिन नगर निगम ने इसके सौंदर्य को और निखारने के जैसे कोई काम नहीं किए।
तालाब और कुएं को संरक्षित रखने की जरूरत थी, लेकिन उन्हें सुखा दिया गया। उद्यान की साज-सज्जा पर पिछले 20 साल में करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। लेकिन तालाब का अस्तित्व बचाने के कोई प्रयास नहीं हुए। जबकि सरकार तालाब और कुआं को संरक्षित करने पर ज्यादा जोर दे रही है। 15 साल पहले इसी तालाब किनारे लाखों रुपये खर्च कर म्यूजिकल फाउंटेन बनाया गया। लेकिन लापरवाही से लाखों रुपये बर्बादी की भेंट चढ़ गए। उसी तालाब में अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत म्यूजिकल, डांसिंग एंड वॉकओवर फाउंटेन बनाया गया है।
फाउंटेन निर्माण के साथ इसकी साज-सज्जा पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। करीब 1.70 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। तालाब के किनारे भी सौंदर्यीकरण कराने की योजना है। ताकि लोग बैठकर फाउंटेन के सौंदर्य को निहार सकें। इसमें भी मोटा बजट खर्च होगा। अभी जिस जगह फाउंटेन लगा है। वहां ऊंची-ऊंची घास है। अव्यवस्था फैली है। इधर, नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान से बात करने के लिए दो बार संपर्क किया। लेकिन संपर्क नहीं हुआ।
80 लाख रुपये से 120 म्यूजिकल स्पीकर लगाए, 20 और लगेंगे
सूख चुके तालाब में करीब 80 लाख रुपये खर्च कर म्यूजिकल, डांसिंग एंड वॉकओवर फाउंटेन बनाया गया है। फाउंटेन के पास करीब 10 लाख रुपये लागत के चार बड़े म्यूजिकल स्पीकर भी लगाए हैं। पौने दो मीटर गहरा एक टैंक बनाया है। इसके ऊपर 300 वर्ग मीटर के एरिया में फाउंटेन लगा है। इसके नीचे चार पानी की मोटरें लगाई हैं। जो रैम्प बनाया है, उसमें 60 फव्वारे हैं। जिसमें रंग-बिरंगी लाइटों के साथ पानी की फुहार 60 फव्वारों से संगीत के साथ हवा में उछलेगी। म्यूजिकल, डांसिंग एंड वाकोवर फाउंटेन के संगीत की आवाज पूरे गांधी उद्यान परिसर गूंजे, इसके लिए करीब 80 लाख रुपये की लागत से 120 छोटे-छोटे म्यूजिकल स्पीकर भी परिसर की सड़कों किनारे लगाए गए हैं। अभी 20 म्यूजिकल स्पीकर और लगने हैं। इसकी निविदा निकाली जा चुकी है।
अधिकारियों का क्या, उन्हें बजट खपाना है
फाउंटेन लगाने से उद्यान की सुंदरता और बढ़ेगी। घूमने आने वालों को अनोखी चीज देखने के लिए मिलेगी, यह बात सही है लेकिन इसके अनियोजित तरीके से लगाए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। उद्यान की देखरेख में लगे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि घूमने आने वाले लोग भी इसकी जरूरत नहीं बता रहे हैं। कर्मचारी बोले-जितनी धनराशि से फाउंटेन बनाया गया है, उतनी धनराशि गांधी उद्यान संवारने में लगाई जाती, तो यह पिकनिक स्पॉट की तरह तैयार किया जा सकता था। परिसर में सड़कों किनारे छोटे-छोटे जो म्यूजिकल स्पीकर लगाए हैं, वह भी ढंग से नहीं लगाए। इनकी ऊंचाई नहीं है।
स्पीकर ऊंचाई पर लगाने के साथ इनके ऊपर बल्व लगाए जाते। ताकि शाम को पूरे परिसर में रंग-बिरंगी की अनोखी छटा प्रदर्शित होती। पार्क की 15 साल से देखरेख करने वाले एक कर्मचारी बोले-अधिकारियों का क्या, उन्हें तो स्मार्ट सिटी का बजट खपाना है। कौन सी चीज, कैसे लगवाई जाए, इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। पार्क में चंद लोग ही घूमने आते हैं। यदि यही फाउंटेन मुख्य गेट के पास अशोक की लॉट परिसर में लगाया जाता, तो हजारों लोग उद्यान आए बिना इसके सौंदर्य का लुत्फ उठा सकते थे।
दो म्यूजिकल ऑपरेटर तैनात
फाउंटेन और म्यूजिकल स्पीकर का संचालन कराने के लिए दो म्यूजिकल ऑपरेटर नियुक्त किए हैं। फाउंटेन का संचालन दिनेश और म्यूजिकल स्पीकर का संचालन धर्मेंद्र करेंगे। दोनों के बैठने के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए हैं। ये कमरे भी इसी बजट में शामिल हैं।
ट्री गार्डों में मोटा बजट खपाया, अब बेकार
गांधी उद्यान में पौधों की सुरक्षा करने के लिए सैकड़ों की संख्या में मोटा बजट खर्च कर ट्री गार्ड बनवाए गए। लेकिन ये ट्री गार्ड अब बेकार हैं। गांधी उद्यान के अंदर बड़ी संख्या में ट्री गार्ड पड़े हुए हैं। उनका प्रयोग नहीं किया जा रहा है।
कुआं जिसे संरक्षित नहीं किया गया
गांधी उद्यान परिसर में तालाब के जितना पुराना कुआं भी है। यह नलकूप के पास स्थित है। लेकिन इए कुएं को संरक्षित करने के प्रयास नहीं हुए। इसके ऊपर लोहे के एंगलों का जाल पड़ा है। कुएं के अंदर तक जाने के लिए उसमें सीढ़ी पड़ी है। ताकि इसकी सफाई की जा सके। लेकिन निगम के जिम्मेदारों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
