अयोध्या: हनुमान के बाद अब रामलला को ज्ञापन, मांग- दीजिए सबको सद्बुद्धि

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अयोध्या। अभिभावकों के सेनापति राकेश मिश्रा ने अखिल भारतीय पीड़ित अभिभावक महासंघ, फलक एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से पौराणिक पीठ हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंत लला के बाद मंगलवार को रामलला को ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास शास्त्री के माध्यम से दिया गया …

अयोध्या। अभिभावकों के सेनापति राकेश मिश्रा ने अखिल भारतीय पीड़ित अभिभावक महासंघ, फलक एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से पौराणिक पीठ हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंत लला के बाद मंगलवार को रामलला को ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास शास्त्री के माध्यम से दिया गया है। ज्ञापन में रामलला से मांग की गई है कि सत्ता और व्यवस्था से जुड़े लोगों को सद्बुद्धि प्रदान करें, जिससे स्कूली बच्चों की फीस माफ हो सके और उनको गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी कक्षोन्नति हासिल हो सके।

कानपुर से अयोध्या पहुंचे राकेश मिश्र ने अभी हाल ही मे मैं मोदी हूं की तख्ती गले में टांग कर राम नगरी की सड़कों पर रिक्शा चलाया था और इस प्रदर्शन के माध्यम से जाति व्यवस्था का विरोध किया था। उन्होंने जाति व्यवस्था के खात्मे के लिए जात प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगाने और गांव के आगे जाति का उल्लेख बंद किए जाने की मांग की थी। दो दिन पूर्व शनिवार को उन्होंने अपनी टीम के सदस्यों के साथ बजरंगबली को ज्ञापन सौंपा था।

आज विराजमान रामलला को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में कहा गया है कि टैक्स चोरी और सरकार से रियायत हासिल करने के लिए विद्यालयों का संचालन ट्रस्ट व सोसायटी एक्ट के तहत किया जा रहा है जबकि लिमिटेड कम्पनी, प्राइवेट लिमिटेड, एलएलपी आदि में किया जाना चाहिए।

शुल्क निर्धारण समिति का गठन होने के बावजूद जिलाधिकारी के आदेश निर्देश पर फीस कम क्यों नहीं हुई। महामारी काल में भी ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है और प्रदेश के शिक्षा मंत्री विद्यालय प्रबंधन के पक्ष में खड़े हैं। मनमानी के चलते कॉलेजों की ओर से आरटीई एक्ट के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा। गरीब पीड़ित अभिभावकों की कोई सुनने वाला नहीं है।

ऐसे में प्रभु राम जी मुख्यमंत्री मंत्री और विद्यालय प्रबंधन के मुखिया को सद्बुद्धि दीजिए। ब्यूरोक्रेसी के अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी प्राइमरी स्कूल में भेजें और ऑनलाइन शिक्षण शुल्क मुक्त विश्वविद्यालय की तर्ज पर वसूला जाए।

इस अवसर पर सीमा त्यागी,विवेक त्यागी, सुनीत तिवारी, मनोज कटारिया, कपिल शर्मा, पुनीष गुलाटी, चनजीत सिंह, अनिल सिंह, कौशलेंद्र सिंह, साधना सिंह, कौशल ठाकुर, भारती शर्मा, विवेक अग्रवाल, विनय कक्कड़, जसवीर रावत, नरेश कसोना, सुनील राणा, मनीष शर्मा, सरजू सुरन, रमणीक तायल, नवाब सिंह, आयुष पाठक, अव्याश, सौंदर्य, मनीष मिश्रा, सुनीत तिवारी, नवीन अग्रवाल, संजीव चौहान, मीनाक्षी गुप्ता, बरखा आहूजा, बरखा शुक्ला, अदिति सक्सेना, अनिल जायसवाल, प्रखर शिवम तिवारी, विवेक तिवारी आदि मौजूद रहे।

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