बरेली: रबर फैक्ट्री- 1440 कर्मचारियों का छह करोड़ का ईपीएफ क्लेम फाइल
अमृत विचार, बरेली। 21 साल से वेतन समेत अन्य भत्तों के मिलने की आस लगाए रबर फैक्ट्री के 1440 कर्मचारियों के लिए राहत देने वाली खबर आई है। कर्मचारी 270 करोड़ रुपये के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब उनकी लड़ाई में कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो गया है। …
अमृत विचार, बरेली। 21 साल से वेतन समेत अन्य भत्तों के मिलने की आस लगाए रबर फैक्ट्री के 1440 कर्मचारियों के लिए राहत देने वाली खबर आई है। कर्मचारी 270 करोड़ रुपये के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब उनकी लड़ाई में कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो गया है।
जहां कर्मचारियों ने 270 रुपये की देनदारी से संबंधित दस्तावेज जिला लेबर कार्यालय से लेकर रिसीवर को भिजवाए हैं, वहीं कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय ने रबर फैक्ट्री प्रकरण में 23 फरवरी को होने वाली सुनवाई से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के नियुक्त रिसीवर एनबी ठक्कर को कर्मचारियों के ईपीएफ क्लेम के छह करोड़ रुपए का फाइनल क्लेम भेजा है। फैक्ट्री के प्रकरण की सुनवाई पर 270 करोड़ रुपए के साथ ईपीएफ का मामला भी जोर-शोर से उठाया जाएगा।
1999 में बंद हुई रबर फैक्ट्री (सिन्थेटिक और केमिकल्स) की जमीन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में केस चल रहा है। फैक्ट्री प्रबंधन ने कई साल पहले फैक्ट्री को नीलाम कराने की कार्रवाई की तो इसका विरोध हो गया। मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिसीवर बैठा दिया था। इधर, अक्टूबर, 2020 में हाईकोर्ट ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए अल केमिस्ट रि-कंस्ट्रक्शन कंपनी को जमीन सौंपने के आदेश कर दिए।
तीन हजार वर्गमीटर जमीन पर अल केमिस्ट को स्वामित्व दिया जा चुका है लेकिन मौके पर पूरी जमीन नहीं होने पर रिसीवर ने प्रक्रिया रोक दी थी। जमीन हाथ से निकलते देख बरेली से लेकर लखनऊ तक खलबली मच गई। शासन की ओर से नामित अधिवक्ता ने राज्य सरकार का 5 जनवरी को हुई सुनवाई में पक्ष रखा तो बड़ी कामयाबी मिली।
हाईकोर्ट ने अल केमिस्ट कंपनी के हक में हस्तांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। नियुक्त रिसीवर एनबी ठक्कर ने भी कोर्ट में फतेहगंज पश्चिमी में पूरी जमीन मौके पर नहीं होने की दस्तावेज लगाए थे। मामले में 23 फरवरी को सुनवाई होनी है। इससे पहले प्रशासन ने घेराबंदी शुरू कर दी है।
पुनर्विचार के लिए याचिका दायर हो रही है। इधर, प्रकरण में पैरवी करा रहे अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय दो दिन से पुनर्विचार दायर होने के संबंध में अपडेट लेने के लिए नामित अधिवक्ता से फोन के जरिए संपर्क में लगे हैं लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
