बेहतर रिश्तों की उम्मीद
अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में बिडेन के शपथ लेते ही यह सवाल उठ रहा है कि उनके नेतृत्व में भारत से अमेरिका के संबंध कैसे रहेंगे? जानकारों के अनुसार वे अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ढर्रे पर चलेंगे। पर कुछ बदलाव भी कर सकते हैं। भारत और अमेरिका का इतिहास कई मामलों …
अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में बिडेन के शपथ लेते ही यह सवाल उठ रहा है कि उनके नेतृत्व में भारत से अमेरिका के संबंध कैसे रहेंगे? जानकारों के अनुसार वे अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ढर्रे पर चलेंगे। पर कुछ बदलाव भी कर सकते हैं। भारत और अमेरिका का इतिहास कई मामलों में समान रहा है।
दोनों ही देशों ने औपनिवेशिक सरकारों के खिलाफ संघर्ष कर स्वतंत्रता प्राप्त की तथा स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में दोनों ने शासन की लोकतांत्रिक प्रणाली को अपनाया। परंतु आर्थिक और वैश्विक संबंधों के क्षेत्र में भारत तथा अमेरिका के दृष्टिकोण में असमानता रही। बाद में 1990 के दशक में भारतीय आर्थिक नीतियों में बदलाव के परिणामस्वरूप भारत और अमेरिका के संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिले तथा पिछले दो दशक में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
21वीं सदी में भारत और अमेरिका के रक्षा, रणनीतिक और सुरक्षा संबंध मजबूत हुए हैं, फिर राष्ट्रपति की कुर्सी पर चाहे रिपब्लिकन बैठा रहा हो या डेमोक्रेट। यही चलन बिडेन प्रशासन में भी बरकरार रहने के आसार हैं। बिडेन ने अपने चुनाव प्रसार के दौरान ही संकेत दिए थे कि वे भारत के प्रति उदार सोच रखते हैं।
एशिया में दो महाशक्तियां हैं- एक चीन और दूसरा भारत। चीन की शक्ति को संतुलित करने के लिए अमेरिका को भारत के साथ रहना ही पड़ेगा। अमेरिका को चिंता है कि ड्रैगन कही दुनिया भर से आगे न निकल जाए। एशिया में शक्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए भारत का शक्तिशाली होना बेहद जरूरी है। हालांकि टीम बिडेन में चीन को लेकर मतभेद हैं। इसका असर भारत-अमेरिका और भारत-चीन के रिश्तों पर भी देखने को मिलेगा। चूंकि अमेरिका और भारत के रिश्ते अब मजबूत हो चले हैं, ऐसे में उसमें बदलाव कर पाना मुश्किल होगा।
उम्मीद की जा रही है कि बिडेन के आने से अमेरिका में आर्थिक नीतियों को लेकर एक स्थायित्व का दौर आएगा और इसका लाभ दुनिया को मिलेगा। उनके आने से खासकर भारत-अमेरिका के व्यावसायिक रिश्ते मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है। समझा जा रहा है कि बिडेन ऐसी स्थायी नीतियां बनाएंगे जो वैश्विक व्यापार के लिए फायदेमंद होंगी और इसका लाभ भारत को भी मिलेगा। राष्ट्रपति बिडेन ने शपथ ग्रहण करने के बाद अमेरिका में अब रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए सभी देशों के लिए तय सीमा को खत्म कर दिया गया है। बिडेन के इस कदम से निश्चित है कि हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों को लाभ होगा।
