भारत की मजबूत हुई साख
भारत में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद अन्य देशों से भी वैक्सीन की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थिति यह है कि दुनिया के 92 देशों ने भारत में बनी वैक्सीन के लिए संपर्क किया है। इससे वैक्सीन हब के रूप में भारत की साख और मजबूत हुई है। शुक्रवार को …
भारत में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद अन्य देशों से भी वैक्सीन की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थिति यह है कि दुनिया के 92 देशों ने भारत में बनी वैक्सीन के लिए संपर्क किया है। इससे वैक्सीन हब के रूप में भारत की साख और मजबूत हुई है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के कोरोना टीकाकरण में शामिल फ्रंट लाइन वर्कर्स से बात करते हुए कहा कि किसी भी वैक्सीन को बनाने के पीछे हमारे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत होती है, इसमें वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। वैक्सीन के बारे में निर्णय करना राजनीतिक नहीं होता, हमने तय किया था कि जैसा वैज्ञानिक कहेंगे, वैसा ही हम करेंगे। देश में 16 जनवरी से कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू किया गया।
गुरुवार तक देश में कुल 10,43,534 टीके लगाए गए। पिछले सात दिनों में रोजाना औसतन 1.74 लाख टीके लगाए जा रहे हैं। इससे पहले दो चरण में ड्राई रन के जरिए देश के तमाम भागों में टीकाकरण का पूर्वाभ्यास किया गया ताकि इसके क्रियान्वयन में कोई दिक्कत न आए। शुरुआती चरण में देश के 30 करोड़ लोगों को टीकाकरण का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान कहा जा रहा है।
अमरीका के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश है, जहां कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आए थे। महामारी के वायरस ने अपना शिकंजा कसने में अमीर-गरीब का फर्क नहीं किया। यही वजह है कि दुनिया के 50 देशों ने वैक्सीनेशन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को अधिकृत किया है, साथ ही लाभार्थियों की प्राथमिकता सूची का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया है ताकि मुनाफाखोरी के लिए टीकाकरण से खिलवाड़ न हो।
अमेरिका जैसे देश में वैक्सीनेशन में विसंगतियां सामने आई हैं, फिर भारत जैसे बड़े देश में तो सभी लोगों तक कोरोना की वैक्सीन पहुंचाना सरकार के लिए असाधारण चुनौती है ही। निस्संदेह जिस तरह देश ने कोरोना संकट को झेला है, एक करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं तथा डेढ़ लाख लोगों ने जीवन खोया है, इससे बचाव का अंतिम उपाय टीकाकरण ही है।
सरकार ने टीकाकरण के लिए परिवहन, कोल्ड स्टोरेज, वितरण व निगरानी को लेकर व्यापक तैयारियां की ताकि टीका सुरक्षित ढंग से जरूरतमंदों तक पहुंच सके। निस्संदेह हम समय पर इस महामारी को हराने में कामयाब हो सकेंगे। यह अच्छी बात है कि भारत में दो वैक्सीन उपलब्ध हैं और वह भी दुनिया में सबसे कम कीमत पर। यही वजह है कि दुनिया के विकासशील और गरीब मुल्क बड़ी उम्मीदों से भारत की तरफ देख रहे हैं।
