पीलीभीत: आर्थिक तंगी से गुजर रहे किसान ने गोली मारकर की आत्महत्या

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार पीलीभीत। आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। किसान काफी दिनों से बहुत परेशान चल रहा था। उसकी मौत के बाद कोहराम मच गया। गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। …

अमृत विचार पीलीभीत। आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। किसान काफी दिनों से बहुत परेशान चल रहा था। उसकी मौत के बाद कोहराम मच गया। गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अपराहन उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

अमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम हेतम डांडी निवासी गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी उम्र 35 वर्ष का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उसने बैंक से कर्ज लिया था और उसकी अदायगी भी संभव नहीं हो पा रही थी। वह कई दिनों से काफी परेशान था। शनिवार की रात उसने देसी तमंचे से अपने सीने में गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर परिजन घर के बाहर भागे। गांव के काफी लोग इकट्ठा हो गए। बुरी तरह घायल गुरप्रीत को जिला अस्पताल लाया गया लेकिन यहां चिकित्सकों ने उसके परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। किसान की मौत के बाद अस्पताल में ही रोना पीटना मच गया। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। आज रविवार को अपराहन उसका गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। गुरप्रीत के पास डेढ़ एकड़ जमीन थी जो उसने बेच दी थी और वह आर्थिक रूप से काफी परेशान था। परिवार का ठीक तरह से भरण-पोषण न हो पाने के कारण भी वह काफी दुखी रहता था। इसी की परिणति आज उसकी आत्महत्या के रूप में हुई।

गुरप्रीत के परिवार में पत्नी के अलावा दो छोटे बेटे हैं । पोस्टमार्टम के बाद जब किसान का शव घर पहुंचा तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था। उसकी विधवा बेहोश होकर गिर पड़ी और बच्चे भी सहमे हुए अपने पिता के शव के पास खड़े होकर बिलख बिलख कर रोते रहे । पूरे गांव में इस घटना के बाद गम का माहौल है। आज हर जुबान पर इस दर्दनाक घटना की ही चर्चा रही।

एक जिंदादिल इंसान का दुखद अंत
गुरप्रीत के आत्महत्या करने से पूरा गांव स्तब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि गुरप्रीत बहुत जिंदादिल खुशमिजाज आदमी था। हर किसी के दुख सुख में काम आता था। बड़ी से बड़ी मुसीबत को हंसकर झेल जाता था लेकिन आर्थिक तंगी ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया। उसने उस जिंदगी को खत्म कर लिया जिस पर सिर्फ उसका ही नहीं उसकी पत्नी और दो मासूम बच्चों का भी हक था।

परिवार का करुण क्रंदन आज हर आंख नम कर गया। हर चेहरे पर गम का साया स्पष्ट परिलक्षित हो रहा था। एक सवाल सबकी आंखों में था क्या हालात किसी इंसान को इतना बेबस कर देते हैं कि गुरप्रीत जैसा शख्स भी अपनी जान दे देता है।

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