हल्द्वानी: कहीं फीकी न पड़ जाए इस बार सेब की मिठास!
हल्द्वानी,अमृत विचार। कोरोना महामारी के चलते फसलों के रेट में कमी से अभी तक राहत नही मिली है। इधर मौसम का संकट भी किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रो में अभी तक बर्फबारी नही होने की वजह से सेब की बागवानी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के आसार है। यहां से …
हल्द्वानी,अमृत विचार। कोरोना महामारी के चलते फसलों के रेट में कमी से अभी तक राहत नही मिली है। इधर मौसम का संकट भी किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रो में अभी तक बर्फबारी नही होने की वजह से सेब की बागवानी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के आसार है। यहां से प्रत्येक वर्ष पांच हजार क्विंटल से ज्यादा सेव का निर्यात किया जाता है। जिससे किसानों को अच्दा मुनाफा प्राप्त होता है।
रामगढ़ के सेब बेहतरीन स्वाद के चलते देश के कोन – कोने में अपनी अलग पहचान रखते है। यहां के सेवों को प्रदेश के अलावा महाराष्ट्रा, उत्तर प्रदेश, छतीसगढ़ और बिहार राज्यों में भी भेजा जाता है। नैनीताल जिले के अंर्तगत नथुवाखान, मुक्तेश्वर, धारी, ओखलकांड़ा, प्यूड़ा, पदमपुरी आदि क्षेत्रों में सेव की बागवानी भारी मात्रा में की जाती है।
बर्फबारी पर टिकी उम्मीदें
उद्यान विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पूर्व 15 दिसंबर तक क्षेत्रों में बर्फबारी हो जाती रही है। इस बार डेढ़ माह का समय निकल चुका है और बर्फबारी नही हुई है। ऐसे में सेव के पौधों मे फ्लावरींग नही हो पाती और फ्रुटिंग में भी असर पड़ता है। दिसंबर की शुरुवात से 72 दिनों के बीच बर्फबारी के दौरान पौधों की जड़ों में विकास होता है और अच्छी पैदावार होती है। सेव के सर्वोत्तम पैदावार के लिए बर्फबारी होना आवश्यक है।
नई वैरायटी से सुधार की उम्मीद
सेव की बागवानी से अच्छा मुनाफा कमाने के लिए लोगों को नई तकनीकी से विकसित की गई वैरायटी पर ज्यादा जोर देना होगा। जिससे बर्फबारी के आभाव में भी फलों की अच्छी पैदावार हो सके। इसके लिए सेव की बागवानी करने वाले किसानों को जागरुक किया जा रहा है। – भावना जोशी, जिला उद्यान अधिकारी, नैनीताल
