म्यांमार में सैन्य तख्तापलट पर भारत ने जताई गहरी चिंता, दुनियाभर में तीखी आलोचना
नई दिल्ली। पड़ोसी देश म्यांमार में एक बार फिर से सैन्य तख्तापलट पर भारत ने गहरी व्यक्त की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा कि ‘भारत ने हमेशा से ही म्यांमार के लोकतंत्र की ओर बढ़ने की प्रक्रिया का समर्थन किया है। हमारा मानना है कि कानून के शासन और …
नई दिल्ली। पड़ोसी देश म्यांमार में एक बार फिर से सैन्य तख्तापलट पर भारत ने गहरी व्यक्त की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा कि ‘भारत ने हमेशा से ही म्यांमार के लोकतंत्र की ओर बढ़ने की प्रक्रिया का समर्थन किया है। हमारा मानना है कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। हम हालात पर निकटता से नजर रख रहे हैं।’’ उधर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने म्यांमार में सैन्य तख्तापलट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
म्यामां में नेताओं को कैद से रिहा करे सेना, अन्यथा होगी कार्रवाई : अमेरिका
म्यामां में सेना के तख्तापलट करने और स्टेट काउंसलर आंग सान सू की समेत देश के शीर्ष नेताओं को सोमवार को हिरासत लेने के कदम से चिंतित अमेरिका ने कहा है कि वह स्थिति पर करीब से नजर बनाये हुए है। साथ ही अमेरिका ने धमकी दी कि अगर देश में लोकतंत्र को बहाल करने के लिए सही कदम नहीं उठाये गये तो वह कार्रवाई करेगा।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने एक बयान में कहा, “अमेरिका म्यांमार की उन रिपोर्टों से चिंतित है जिसमें बर्मी (म्यांमार) सेना ने स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और राष्ट्रपति और अन्य नागरिक अधिकारियों को हिरासत में लेने और देश के लोकतंत्र में परिवर्तन लाने तथा उसे कमजोर करने के लिए ऐसा कदम उठाया है। राष्ट्रपति जो बिडेन को उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने इसकी जानकारी दे दी है।”
साकी ने कहा कि अमेरिका हालिया चुनाव के नतीजों को पलटने के प्रयास या म्यामां में लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता के हस्तांतरण को रोकने के कदम का विरोध करता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन कदमों को वापस नहीं लिया गया तो अमेरिका इसके लिये जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। साकी ने कहा, ‘‘हमलोग स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और म्यामां के लोगों के साथ हैं जिन्होंने लोकतंत्र एवं शांति के लिए पहले ही काफी कुछ झेला है।’’
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी सू ची तथा अन्य नेताओं को सेना द्वारा हिरासत में लेने की कड़ी निंदा की तथा सत्ता सेना के हाथों में जाने पर चिंता जताई। गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, ‘‘म्यामां में नई संसद का सत्र आरंभ होने से पहले स्टेट काउंसलर आंग सान सू की, राष्ट्रपति यू विन मिंट तथा अन्य राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लेने के कदम की महासचिव कड़ी निंदा करते हैं।’’ उन्होंने इसे म्यामां में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए एक बड़ा झटका बताया।
अमेरिका के विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकेन ने कहा कि म्यामां की सेना द्वारा स्टेट काउंसलर सू की एवं अन्य अधिकारियों समेत सरकार के नेताओं को हिरासत में लिये जाने की घटना से अमेरिका बेहद चिंतित है।
ब्लिंकेन ने एक बयान में कहा, ‘‘हमने म्यामां की सेना से सभी सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिहा करने का आह्वान किया है और आठ नवंबर को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुए चुनावों में म्यामां की जनता के फैसले का सम्मान करने को कहा है। अमेरिका लोकतंत्र, स्वतंत्रता, शांति एवं विकास के आकांक्षी म्यामां के लोगों के साथ है। सेना को निश्चित रूप से इन कदमों को तुरंत पलटना चाहिए।’’
उल्लेखनीय है कि म्यांमार की सेना ने आज सुबह सत्तारूढ पार्टी की आंग सान सु की, राष्ट्रपति विन मिंट के साथ साथ पार्टी के अन्य सदस्यों को छापेमारी कर हिरासत में ले लिया। गत माह जनवरी में म्यांमार के सेना ने आठ नवंबर के चुनाव के दौरान में मतदान में व्यापक रूप से धांधली होने पर तख्तापलट की आशंका जताई थी, यह चुनाव देश में वर्ष 2011 में सैन्य शासन के अंत के बाद दूसरा आम चुनाव हुआ था।
