मुरादाबाद: बजट से कोई खुश तो कोई दिखा उदास
मुरादाबाद,अमृत विचार। देश के पहले डिजिटल आम बजट की घोषणा को व्यापारी, नौजवान, किसान, छात्र, महिलाएं, बुद्धिजीवी और बेरोजगार अपने-अपने ढंग से परिभाषित करते हैं। टेलीविजन चैनल पर वित्त मंत्री के बजट भाषण शुरू होने के साथ हर वर्ग के लोग स्क्रीन पर नजर गड़ा लिए। कोई मोबाइल पर अपडेट लेता रहा तो कुछ लोग …
मुरादाबाद,अमृत विचार। देश के पहले डिजिटल आम बजट की घोषणा को व्यापारी, नौजवान, किसान, छात्र, महिलाएं, बुद्धिजीवी और बेरोजगार अपने-अपने ढंग से परिभाषित करते हैं। टेलीविजन चैनल पर वित्त मंत्री के बजट भाषण शुरू होने के साथ हर वर्ग के लोग स्क्रीन पर नजर गड़ा लिए। कोई मोबाइल पर अपडेट लेता रहा तो कुछ लोग समूह में टेलीविजन स्क्रीन के सामने बैठ गए। गांव में भी बजट ने रोमांच दिखाया।
चौपाल से लेकर खेत और पगडंडियों पर बजट पर बहस शुरू हो गई। किसी ने बजट को मौजूदा परिस्थितियों में देश को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने वाला संकल्प बताया तो किसी ने जनभावना के खिलाफ माना। दिनभर इस मुद्दे पर बस होती रही। आधी आबादी किचन से लेकर बाजार तक का गणित समझती देखी गई। आयकर का दायरा नहीं बढ़ना भी चर्चा में रहा। वरिष्ठ नागरिकों को आईटीआर से छूट मिलने पर भी रोमांचक प्रतिक्रिया रही। पेश है विविध वर्ग की प्रतिक्रिया उन्हीं के हवाले-
महिलाओं ने आम बजट पर अलग- अलग प्रतिक्रिया
मुरादाबाद। आधी आबादी ने आम बजट पर अलग- अलग प्रतिक्रिया दी। कामकाजी महिलाओं और रोजमर्रा की जरूरतों से जूझने वाली महिलाओं ने बजट को लेकर नपा-तुला बयान दिया। ब्यूटीशियन शीतल नागपाल कहती हैं कि महिलाओं के नाम पर राजनीति में भी माइलेज लेने का सभी दल प्रयास करते हैं लेकिन, सरकार झुनझुना से अधिक कुछ नहीं देती। पार्षद शबाहत अंजुम का कहना है कि आम बजट खुद समझना ही आसान नहीं है। युवा, छात्र, नौजवान और महिलाओं को झुनझुना मिला है। सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत कौर का कहना है कि सरकार ने रेल को आम बजट में शामिल करके रेलवे को अनाथ कर दिया है। बजट से ट्रेनों के विस्तार और यात्री सुविधाओं के विकास की व्याख्या नहीं की जा सकेगी।
विपिन गुप्ता, व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश
बजट…कोरोना के कारण विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त हैं। संक्रमण काल में व्यावहारिक और विकासमुखी बजट का व्यापारी समाज खुशी जाहिर करता है। आम बजट समाज के सभी वर्गों को सुख एवं समृद्धि सख्त करने वाला है। गांव-गरीब और किसान के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दिखाई दे रही है। देश तरक्की करेगा और विकास की कीर्तिमान रचेगा।
सुदेश आर्या, सामाजिक संगठन
बजट देश की परिस्थितियों और चुनौती से लड़ने वाला है। यह देश और आम आदमी के अनुकूल है। आर्थिक सुदृढ़ीकरण के संकल्प हैं। राष्ट्र के भविष्य को प्राथमिकता दी गयी है। देश की सुरक्षा, विकास, किसान, छात्र और महिलाओं के हित का पूरा ख्याल है। प्रत्येक वर्ग के लिये हितकारी है। आधी आबादी के सवालों पर सरकार ने ध्यान दिया है।
केके मिश्र, भाजपा
कोरोना महामारी के बीच सरकार ने हर वर्ग के लोगों का ख्याल रखा है। सच कहूं तो यह बजट देश के सर्वांगींण विकास के लिए बना है। सर्वहारा के हित से केंद्रित है। निश्चित रूप से देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। खास बात या कि किसानों के नाम पर प्रलाप करने वालों को बजट में करारा जवाब दिया है।
डा. मंजेश राठी
मेडिकल क्षेत्र में और कुछ किया जाना चाहिए था। यह सच है कि कोरोना से जंग के लिए सरकार ने 35 हजार करोड़ के फंड का ऐलान किया है लेकिन, सरकार को मेडिकल क्षेत्र में और ध्यान देना चाहिए। देश शुगर रोगियों के मामले में दुनिया में सबसे टॉप पर है। स्वास्थ सेवाओं के लिए और बजट चाहिए था।
विनोद गुंबर, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
यह बजट कारपोरेट और बड़े घरानों को खुश करने के लिए है। सरकार ने साबित कर दिया है कि उसका आम आदमी से कोई लेना देना नहीं। बजट महंगाई बढ़ेगी और लोगों की दुश्वारियां। यह सरकार आम आदमी की नहीं है। किसान परेशान हैं और नौजवान परेशान है।
डॉ रणविजय सिंह, बसपा
यह बजट किसान और आम आदमी को ठगने वाला है। पेट्रोलियम पदार्थों पर सेस लगाया गया है। निश्चित रूप से जल्द ही पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ेंगे। जिससे महंगाई आएगी। मध्यम वर्ग और गरीब को परेशान होना पड़ेगा। लोगों को आयकर के स्लैब में वृद्धि की उम्मीद थी।
जयवीर सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
किसान, छात्र, नौजवान और व्यापारियों को उदास किया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार से लोगों को काफी उम्मीद थी। लेकिन यह बजट कारपोरेट घरानों को हित को देखते हुए बनाया गया है। महंगायी आएगी और बेरोजगारों की फौज खड़ी होगी।
राजपाल सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा
बजट तमाम चुनौतियों से देश को आगे बढ़ाने वाला है। बहुत ही बढ़िया बजट है। किसान की आमदनी बढ़ेगी और देश आर्थिक मोर्चे पर खड़ा होगा। इससे जीडीपी में सुधार होगा। कोरोना को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। हर वर्ग को खुशी मिली है।
