बरेली: ओएमआर आधारित होगी लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षा
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षा व्यवस्था में भी सुधार किया जा रहा है। दो दिन पहले विषय पाठ्यक्रम समिति की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी है। जिसमें प्रत्येक विषय का पहला प्रश्नपत्र बहुविक्लपीय होने के साथ ओएमआर आधारित भी होगा। लिखित परीक्षा के साथ प्रयोगात्मक व मौखिक परीक्षा …
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षा व्यवस्था में भी सुधार किया जा रहा है। दो दिन पहले विषय पाठ्यक्रम समिति की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी है। जिसमें प्रत्येक विषय का पहला प्रश्नपत्र बहुविक्लपीय होने के साथ ओएमआर आधारित भी होगा। लिखित परीक्षा के साथ प्रयोगात्मक व मौखिक परीक्षा भी बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से करायी जा सकती है। विषय पाठ्यक्रम समिति की संस्तुति के बाद इसे एकेडिमिक काउंसिल में रखा जाएगा। इसके अलावा भविष्य में परीक्षा को उच्चीकरण और नकलविहीन करने के लिए ऑनलाइन परीक्षा भी करायी जा सकती है।
छात्रों को पूरे पाठ्यक्रम का ज्ञान अनिवार्य रूप से हो सके। इसके लिए ही परीक्षा के तरीकों में बदलाव किया जा रहा है। 23 दिसंबर को परीक्षा नियंत्रक ने कुलपति के द्वारा गठित चार सदस्यी कमेटी की बैठक की थी। जिसमें कई प्रस्ताव पास हुए थे। शनिवार को विषय पाठ्यक्रम समितियों के संयोजकों की बैठक में इन प्रस्तावों को रखा गया। जिन्हें संयोजकों ने अपनी संस्तुति दी। अब एकेडिमिक काउंसिल की संस्तुति के बाद इसे लागू किया जाएगा।
परीक्षा व्यवस्था में जो प्रमुख बदलाव किए जा रहे हैं, उनमें प्रत्येक विषय के एक प्रश्नपत्र को बहुविकल्पीय और ओएमआर आधारित करने के लिए 33 अंको के प्रश्नपत्र को 30 अंक का संशोधित कर उक्त प्रश्नपत्र में 90 वस्तुनिष्ठ प्रश्न सेट किए जाएंगे। इसी तरह से 50 अंकों और 100 अंकों के प्रश्नपत्र में 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न सेट किए जाएंगे। इसके अलावा इन पेपर की परीक्षा का समय भी 3 घंटे से घटाकर 2 घंटे किए जाएगा। चरणवद्ध रूप से इस प्रक्रिया को अन्य प्रश्नपत्रों में भी बढ़ाया जा सकता है।
विज्ञान के सभी विषयों के पूर्णांक के 20 से 25 फीसदी तक वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित ओएमआर आधारित एक परीक्षा करायी जाएगी। जिसमें संबंधित प्रयोगिक विषयक का सम्पूर्ण पाठ्यक्रम समाहित हो। इससे छात्र के पाठ्यक्रम से संबंधित पूर्ण ज्ञान का आंकलन किया जा सकेगा और उसे एक स्तरीय उपाधि मिल सकेगी।
कला और वाणिज्य एवं सामाजिक विज्ञान से संबंधित मौखिक परीक्षा के लिए कुल पूर्णाकों का 50 प्रतिशत वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के आधार पर लिखित परीक्षा करायी जाएगी। इस तरह की परीक्षा का मकसद साफ है कि इससे छात्रों को पूरे पाठ्यक्रम की पढ़ाई करनी होगी। उनका भविष्य में नौकरी की तैयारी में भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा नकल पर भी काफी हद तक रोक लगेगी।
